बंबई प्राथमिक शिक्षा अधिनियम-संशोधन विधेयक 69
वाले तीन सदस्य उन व्यक्तियों में होने चाहिए, जो शिक्षा के क्षेत्र में विशेषज्ञ के रूप में विख्यात हैं। उन्हें इस मामले को इसी तरह अस्पष्ट नहीं छोड़ना चाहिए। जैसा कि सरकारों और स्वयं हमारे सामने कमजोर स्थितियां आती हैं, सरकार अपनी इस कमजोर स्थिति में हो सकती है कि ऐसे व्यक्तियों को नियुक्त कर दे जो विशेषज्ञ न हों। इससे इस खंड का मुख्य उद्देश्य विफल हो जाएगा।
माननीय श्री बी.जी. खेर : स्वयं अपनी ही पार्टी के एक सदस्य द्वारा प्रस्तुत किए गए संशोधन के संबंध में जवाब के लिए मैं माननीय सदस्य डॉ. अम्बेडकर का आभारी हूं। मैं जानता हूं कि मैं स्वयं इस संशोधन के विरोध में इतना जोरदार तर्क नहीं दे सकता था।
II * (खंडानुसार वाचन)
माननीय अध्यक्षः अब हम प्राथमिक शिक्षा अधिनियम, संशोधन विधेयक संख्या 15 पर आगे विचार करेंगे। मैं समझता हूं कि पिछले मंगलवार को सदन में इस विधेयक पर विचार चल रहा था और जब बैठक स्थगित हुई, तो संशोधनों की समेकित सूची में संशोधन संख्या 91 पर बहस जारी थी। यह संशोधन माननीय श्री जमनादास मेहता ने प्रस्तुत किया था और यह इस प्रकार है :
खंड 12 के उपखंड (2) में ‘और एक कर्मचारी होगा’ शब्दों को निकाल दिया जाए।
अब यह खंड संशोधित रूप में इस प्रकार होना चाहिए :
(2) प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति प्रांतीय सरकार द्वारा की जाएगी। उसका वेतन, अधिकार और कर्तव्य नियमानुसार निर्धारित होंगे।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : महोदय! क्या मैं नियमानुसार आपत्ति उठा सकता हूं? संशोधन और उसका तात्पर्य मेरी समझ में नहीं आया है। इसलिए मैं इस विषय में कुछ सूचना प्राप्त करना चाहता हूं। इस संशोधन के द्वारा ‘और प्रांतीय सरकार का एक कर्मचारी होगा’ शब्दों को हटाना है, क्या मेरा यह कहना ठीक है? इसलिए इस संशोधन का तात्पर्य ऐसा लगता है . . .
माननीय अध्यक्ष : जिन शब्दों को हटाना है, वे हैं ‘और एक कर्मचारी होगा’। ‘प्रांतीय सरकार’ शब्दों को हटाने का प्रस्ताव नहीं किया गया है।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : इसलिए मैं समझता हूं कि उसकी नियुक्ति प्रांतीय सरकार द्वारा की जानी है, लेकिन वह प्रांतीय सरकार का कर्मचारी नहीं होगा। मेरा निवेदन है कि कानूनन यदि ‘और एक कर्मचारी होगा’ शब्दों को हटा भी दिया जाए,
* बोंबे लेजिस्लेटिव असेम्बली डिबेट्स, खंड 3, पृ. 2647-49, 30 अप्रैल 1938