बंबई प्राथमिक शिक्षा अधिनियम-संशोधन विधेयक
73
यह स्वीकृत सिद्धांत है कि एक अधिकारी जिस प्राधिकारी की सेवा में है, वह उसके अधीनस्थ होना चाहिए। खंड 12 द्वारा हमने व्यवस्था की है कि प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति प्रेसिडेंसी की सरकार द्वारा की जाएगी और उसी सरकार का कर्मचारी होगा। मेरे माननीय मित्र श्री जमनादास मेहता द्वारा प्रस्तुत इस संशोधन पर सदन में जो अनेक सदस्य बोले, उन सभी ने इस दोषमुक्त विसंगति की ओर ध्यान दिलाया है। इसलिए जो कुछ कहा जा चुका है, उसे दोहराकर मैं सदन का समय नहीं लेना चाहता। खंड 12 को अधिनियमित करने का क्या परिणाम होगा? मुझे माननीय प्रधानमंत्री द्वारा अपनाई गई इस प्रक्रिया के कारण उनसे पूरी सहानुभूति है कि प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति प्रेसिडेंसी की सरकार द्वारा की जानी चाहिए और वह उसी सरकार का कर्मचारी होना चाहिए।
उनके प्रति मेरी सहानुभूति दो कारणों से है। पहला कारण यह है कि स्थानीय बोर्डों या स्कूल बोर्डों द्वारा प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति की जाती रही, तो उसका एक नतीजा यह होगा कि प्रशासनिक अधिकारी को अपना सारा जीवन एक ही स्थान पर बिताना होगा, जो कि सिद्धांत रूप से निस्संदेह एक बुरी बात है, क्योंकि जब कोई अधिकारी किसी एक ही जगह पर सेवा में रहता है तो वह अपनी मित्र मंडली बना लेता है और इससे उसे अपने प्रशासनिक अधिकारों को पक्षपातपूर्ण तरीके से उपयोग करने के अवसर प्राप्त हो जाते हैं। इसलिए इन प्रशासनिक अधिकारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जाना जरूरी है, जैसा कि जिलाधीश, जिला जज जैसे महत्त्वपूर्ण अधिकारियों को एक जिले से दूसरे जिले में भेजे जाने की व्यवस्था है। माननीय प्रधानमंत्री द्वारा अपनाई गई इस प्रक्रिया के कारण उनके प्रति मेरी सहानुभूति का दूसरा कारण यह है कि जब तक एक सरकार प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति नहीं करती, तब तक नियमित सेवा का ऐसा कॉडर नहीं बनाया जा सकता, जिसमें पदोन्नति के अवसर आदि हों। मेरी इस संबंध में पूरी सहमति है। परंतु, महोदय! मेरी समझ में यह नहीं आ रहा है कि कम से कम अनुशासनात्मक नियंत्रण के उद्देश्य से सरकार को इन अधिकारियों को स्कूल बोर्डों के अधीन करने में क्या कठिनाई है। जैसा कि विधेयक में संकल्पना की गई है, मैं यह नहीं समझता कि स्थानीय बोर्ड मशीनरी के सही संचालन की आशा कैसे की जा सकती है, जब तक कि मेरे सुझावों पर अमल नहीं होता है।
अब मैं भारत सरकार अधिनियम के अधीन क्या हुआ है, उससे उदाहरण देकर बताना चाहूंगा। उदाहरण के तौर पर मैं भारतीय प्रशासनिक सेवा के सदस्यों की स्थिति को लेता हूं। भारतीय प्रशासनिक सेवा के सदस्यों की नियुक्ति भारत मंत्री द्वारा की जाती है। मेरा मानना है कि मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड रिपोर्ट जिन्होंने पढ़ी है, वे जानते होंगे कि उसे तैयार करते समय मंत्रियों को प्रभावी नियंत्रण हस्तांतरित करने के संबंध में जो सबसे बड़ी कठिनाई सामने आई, वह थी भारतीय प्रशासनिक सेवा के सदस्यों का विरोध। इस सेवा के सदस्यों की आपत्ति थी कि क्योंकि उनकी नियुक्ति भारत मंत्री द्वारा की गई है, उन मंत्रियों द्वारा नहीं, जो तत्कालीन सुधारों के तहत अधिकृत