5. बंबई प्राथमिक शिक्षा अधिनियम-संशोधन विधेयक - Page 91

74 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

किए जा रहे थे, वे इन मंत्रियों के नियंत्रण में कार्य नहीं कर सकते। दूसरी ओर, जो इस बात के पक्षधर थे कि भारतीय मंत्रियों को प्रभावी अधिकार सौंपे जाएं, उन्होंने यह निर्णय लिया कि भारतीय मंत्रियों को उस समय तक प्रभावी अधिकार हस्तांतरित नहीं हो सकते, जब तक कि उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को नियंत्रण में रखने के लिए वास्तविक अधिकार प्राप्त न हों, जो प्रशासन के माध्यम हैं। बहुत समय तक रस्साकशी चलती रही और यदि मुझे ठीक से याद है तो समझौते के तौर पर यह निर्णय लिया गया कि ली-कमीशन के अनुसार मध्यम मार्ग अपनाया जाए तथा वह मध्यम मार्ग वह हो सकता है, जो मैं अपने संशोधन द्वारा पेश कर रहा हूं। जिस मध्यम मार्ग का प्रशासनिक सेवा और भारतीय राजनीतिज्ञों, दोनों के दृष्टिकोण के अनुसार सुझाव दिया गया वह यह था कि प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह भारत मंत्री के अधीन रहेंगे और वे प्रशासनिक अधिकारी जो द्विशासन-प्रणाली के अधीन स्थानांतरित विभागों में कार्य करते हैं, उन पर मंत्रियों का अनुशासनात्मक नियंत्रण रहेगा। वर्गीकृत नियमों के अंतर्गत किसी उद्दंड प्रशासनिक अधिकारी को, जो मंत्री की अवज्ञा करता हो, उसे मंत्री द्वारा पांच प्रकार से दंडित किया जा सकता है। जो दंड निर्धारित किए गए थे, वे थे — प्रताड़ना, पदावनति, प्रोन्नति अवरोध, स्थानांतरण और बर्खास्तगी। साथ ही, यदि कोई प्रशासनिक अधिकारी यह सोचता हो कि मंत्री ने उसे जो सजा दी है, वह युक्तिसंगत नहीं है, अन्यायपूर्ण है, या जातीय विद्वेष के कारण दी गई है, तो उसे अपील करने का अधिकार था। प्रशासनिक अधिकारी पहले गवर्नर के पास और अंततः भारत मंत्री के पास अपील कर सकता था, तथा मंत्री के आदेश को चुनौती दे सकता था। इस प्रकार दो विवादास्पद विचारों — नियंत्रण नहीं और पूर्ण नियंत्रण — पर समझज्ञैता हुआ और इस प्रकार जो फार्मूला निकाला गया, वह यह था कि प्रशासनिक अधिकारी भारत मंत्री के ही अधीन रहे और उसे वही अधिकारी बर्खास्त कर सकता है जो उसे नियुक्त करता है, पर जब तक वह किसी विभाग में कार्यरत हो तो वह संबद्ध मंत्री के अनुशासन में कार्य करे। महोदय, मैंने जो संशोधन पेश किया है, वह केवल इसी फार्मूले के परिपालन से संबद्ध है। इससे मंत्री के नियुक्ति के अधिकार का हनन नहीं होता। इसके अनुसार प्रशासनिक अधिकारी का बर्खास्त करने का मंत्री का अधिकार नहीं छिनता, ना ही इस संशोधन का तात्पर्य यह है कि प्रशासनिक अधिकारी किसी स्कूल बोर्ड में कार्यरत होने के दौरान स्कूल बोर्ड का कर्मचारी माना जाए। इस संशोधन का आशय सीमित है। यह मात्र यही कहता है कि स्कूल बोर्ड में कार्यरत होने के दौरान वह बोर्ड के अनुशासन में रहे। फिर, स्कूल बोर्ड किस प्रकार का दंड दे और अधिकारी की अपील कैसी हो, ये ऐसे मामले हैं, जिनके बारे में मेरे संशोधन में कहा गया है कि सरकार नियम बनाकर निर्धारित करे। मैं यह नहीं कहता कि स्कूल बोर्ड प्रशासनिक अधिकारी को क्या सजा दे। मैं यह नहीं कहता कि अमुक मामले में अपील करने का अधिकार दिया जाए। सजा की व्यवस्था और अपील की सीमाएं, इन सभी मामलों को सरकार को नियमों द्वारा निर्धारित करना है। इस संशोधन में मात्र यह सुनिश्चित किया गया कि स्कूल बोर्ड में कार्यरत होने के दौरान अधिकारी को यह महसूस होना चाहिए कि स्कूल बोर्ड का उस पर नियंत्रण है। मैं यह बिल्कुल नहीं समझ पाता कि यदि