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बंबई वंशानुगत कार्य अधिनियम-संशोधन विधेयक

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में बदल दिया गया है, वे जिलाधीश से आवेदन कर सकते हैं कि वह यह निश्चित करे कि सरकार और किसान किस अनुपात में भुगतान करें। जिलाधीश इस संबंध में फैसला देगा और वह अंतिम होगा।

19घ. प्रतिनिधि वतनदारों का संपूर्ण संगठन या उनकी बहुसंख्या को, जिन्होंने धारा 19ग में वर्णित निर्णय का अनुरोध किया है, यह छूट होगी कि यदि वे जिलाधीश को अपने फैसले पर लिखकर आवेदन देते हैं, तो वे किसानों की सेवा से इंकार कर सकते हैं। यदि यह छूट लागू होती है, तो यह छूट पाने वाले वतनदार उपकर के उस अंश के अधिकारी नहीं होंगे, जो उन्हें किसानों से मिलता है। 7. 1874 के बंबई अधिनियम 3 की धारा 21 में संशोधन — धारा 21 में वर्णित इस अवधि के स्थान पर निम्नांकित वाक्यांश पढ़ा जाए : अधिकतम दस वर्ष की अवधि। 8. 1874 के बंबई अधिनियम 3 की धारा 83 में संशोधन — धारा 83 के स्थान पर यह धारा समाविष्ट की जाए :

83 धारा अधिनियम बन जाने पर धारा 18 की व्यवस्था को छोड़कर सरकार नियम बनाए जिसमें किसी वंशानुगत कार्य के दायित्वों का वर्णन हो : — यदि इस प्रकार के नियम बनाए गए हैं, तो वे उस समय तक लागू नहीं होंगे, जब तक कि बंबई विधान परिषद के अगले अधिवेशन के पूर्व उनका प्रकाशन बंबई राजकीय गजट में नहीं हो जाता है और उनको उपरोक्त परिषद के अगले अधिवेशन में प्रस्तुत संकल्प के द्वारा निरस्त किया जा सकता है अथवा संशोधित किया जा सकता है।

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Col1 Col2 Col3
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Col1 Col2 Col3

विधेयक के उद्देश्य हैं :

  1. कार्यरत वतनदारों के लिए बेहतर पारिश्रमिक की व्यवस्था करना।
  2. क्षुद्र वंशानुगत ग्राम्य सेवकों के वेतन के रूपांतरण की अनुमति प्रदान

करना।

  1. बेलूते को नकदी में बदलना।

  2. क्षुद्र वेतन धारक को किसानों की सेवा के दायित्व से मुक्त कराने की अनुमति

देना।

  1. कार्यरत वेतनदारों के दायित्व निर्धारित करना।

बंबई, 13 अप्रैल 1928 (हस्ताक्षर) भी.रा. अम्बेडकर

जी.एस. राज्याध्यक्ष,

बंबई के गवर्नर की विधान

परिषद में कार्यवाहक सचिव