6. बंबई वंशानुगत कार्य अधिनियम - Page 99

82 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

और महार समुदाय के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार घोषित कर दिया, क्योंकि एक महार ने गांव में अपने घर में खपरैल लगाने का साहस किया था। महोदय! ऐसी व्यवस्था जो समस्त जनता को दास बना देती है, उन्नति की भावना दबा देती है और आगे बढ़ने का रास्ता बंद कर देती है। वह एक ऐसी व्यवस्था है, जिसे मेरे विचार में कोई भी विवेकशील और संवेदनशील व्यक्ति स्वीकार नहीं करेगा और न ही न्यायसंगत ठहराएगा। महोदय! इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि समस्त महार समुदाय निश्चित रूप से वतन-प्रणाली से परेशान है। किसी चुनौती की आशंका के बिना मैं अपने माननीय मित्र राजस्व मंत्री को बताना चाहता हूं कि समस्त महार समुदाय इस व्यवस्था से अत्यधिक दुखी है और इससे तुरंत छुटकारा पाने को आतुर है। मैं इन कुछ प्राथमिक टिप्पणियों के साथ सदन के समक्ष आज जो विधेयक है, उसके कुछ प्रावधानों को स्पष्ट करूंगा।

महोदय! मेरे विधेयक पर विचार करने के लिए यह आवश्यक है कि इस बात का ध्यान रखा जाए कि मैं महार वतनदारों को दो भागों में विभाजित करना चाहता हूं। पहले वर्ग में वे वतनदार आते हैं, जो पूरी तरह से दुखी हैं और वतन-प्रणाली से किसी प्रकार संबंध नहीं रखना चाहते हैं। यह वर्ग तत्काल सेवाकार्य के बंधन से मुक्ति चाहता है। उनकी केवल एक ही शर्त है कि यदि वे वतन यानि सेवाकार्य के उत्तराधिकार को छोड़ दें, तब भी जो भूमि उनके कब्जे में है, उससे उन्हें वंचित नहीं किया जाए। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए मैंने वर्तमान वतन अधिनियम के खंड 4 के द्वारा धारा 15 (1) में एक उपबंध जोड़ा है। इस उपबंध द्वारा मेरा सुझाव है कि वतनदार महारों का एक प्रतिनिधि संगठन अथवा अधिकांश महार कलक्टर को लिखित रूप में निवेदन करें कि वे सेवाकार्य नहीं करना चाहते हैं और अपनी भूमि का पूरा लगान देना चाहते हैं, तो कलक्टर को उन्हें सेवाकार्य की बाध्यता से मुक्ति देनी चाहिए। इस उपबंध का यही अर्थ है। सर्वप्रथम, मैं बताना चाहूंगा कि इस उपबंध का सिद्धांत नया नहीं है। यह सिद्धांत बड़ा पुराना है, जिससे सरकार परिचित है और जिसे सरकार ने स्वीकार किया है तथा अनेक अवसरों पर उसका पालन किया है। महोदय! इस सदन अथवा कम से कम सदन के अधिकांश माननीय सदस्यों को मालूम होगा कि इस देश में ब्रिटिश शासन की स्थापना से पूर्व गांवों में बारह प्रकार के सेवादार होते थे, जिन्हें बलूतेदार कहा जाता था। जब ब्रिटिश सरकार ने इस देश के प्रशासन की बागडोर संभाली, उन्होंने इन बारह अधिकारियों को तीन समूहों में वर्गीकृत कर दिया। एक तो वे अधिकारी थे, जिनकी सेवाओं की सरकार को आवश्यकता थी, दूसरे वे थे, जिनकी सेवाओं की केवल किसानों के लिए आवश्यकता थी और तीसरे वे थे, जिनकी दोनों को आवश्यकता थी। जिन ग्राम सेवकों की केवल किसानों को आवश्यकता थी, सरकार ने चर्चित गोर्डन समझौते के तहत उनके वेतन को रूपांतरित कर दिया, अर्थात् उनके द्वारा पूरा निर्धारित राजस्व देने की सहमति पर, उन्हें अपनी भूमि पर पूरा कब्जा रखने की अनुमति दी गई। महोदय! मेरे विधेयक का उपबंध गोर्डन समझौते के सिद्धांत को मूर्तरूप देने के अलावा और कुछ नहीं है। अपने इस कथन के समर्थन में कि विधेयक