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किया जाना आवश्यक है और इस विशेष संशोधन संख्या 217 का प्रयोजन उन विशेष अनुच्छेदों को दर्शाना है जिनमें ये संशोधन आवश्यक हैं ताकि भाग III में राज्यों की विशेष परिस्थितियों का सामना किया जा सके। अन्यथा भाग III में राज्यों के जहाँ तक आंतरिक गठन का संबंध है, वह भाग I में उल्लिखित राज्यों के समकक्ष होंगे।
1 प्रो. शिब्बनलाल सक्सेनाः मैं जो संशोधन प्रस्तुत कर रहा हूँ वह सूची XII में है जिसकी संख्या 288 है।
श्री सभापतिः यह मुझे अभी-अभी मिला है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः आप इसे किस प्रकार प्रस्तुत कर सकते हैं?
प्रो. शिब्बनलाल सक्सेनाः सभापति महोदय ने जिस संशोधन को पढ़ा है, उसे प्रस्तुत नहीं कर रहा हूँ। मैं तो सूची XII की संशोधन संख्या 288 प्रस्तुत कर रहा हूँ।
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भारत की संविधान सभा 80 कंस्टीट्यूशन हॉल, नई दिल्ली में म.पू. 10.00 बजे एकत्रित हुई। श्री सभापति (माननीय डा. राजेन्द्र प्रसाद) पीठासीन थे।
1 सी.ए.डी. खंड 10, 12 अक्तूबर, 1949, पृष्ठ 158