भाग V - Page 99

84 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

देवास्वम निधि के लिए इक्यावन लाख रुपए की धनराशि का वार्षिक भुगतान

किया जाएगा।’’

(11) अनुच्छेद 183 में, खंड (2) के स्थान पर, निम्नलिखित खंड प्रतिस्थापित

किया जाएगाः-

‘‘(2) इस अनुच्छेद के खंड (1) के अधीन जब तक नियम नहीं बनाए जाते

हैं, राज्य के विधानमंडल के संबंध में इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले

प्रभावी प्रक्रिया नियम और स्थानीय आदेश या जिस राज्य में विधानमंडल का

कोई सदन विद्यमान नहीं है, ऐसे प्रांत की विधानसभा के संबंध पूर्व प्रभावी

प्रक्रिया नियम और स्थायी आदेशों, जैसा कि राज्य के राजप्रमुख द्वारा इस

संबंध में उन संशोधनों और अनुयोजन के विषयाधीन प्रभावी होगा। जैसा कि

विधानसभा के अध्यक्ष या विधान परिषद के सभापति, जो भी स्थिति हो,

द्वारा उसमें किया जाए।’’

(12) अनुच्छेद 191 के खंड (2) में, ‘‘प्रांत’’ शब्द के स्थान पर ‘‘भारतीय

राज्य’’ शब्द प्रतिस्थापित किए जाएँगे।

(13) अनुच्छेद 197 के स्थान पर, निम्नलिखित अनुच्छेद स्थापित किया

जाएगा, अर्थातः-

‘‘197’’ न्यायाधीशों के वेतन प्रत्येक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश उन वेतनों

और भत्तों तथा छुट्टी, अनुपस्थिति और पेंशन के मामले में उन अधिकारों

के हकदार होंगे जो राष्ट्रपति द्वारा राजप्रमुख के परामर्श से समय-समय पर

अवधारित किया जाएगा परंतु किसी न्यायाधीश के वेतन में और अनुपस्थिति,

छुट्टी, पेंशन के संबंध में उसके अधिकारों में उसकी नियुक्ति के पश्चात्

उसके लिए अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जाएगा।’’

मैं बाद में अन्य संशोधन प्रस्तुत करूँगा।

जैसा कि देखा जा सकता है, कि इस भाग में यह विचार अंतर्निहित है कि इस संविधान के भाग VI जिसमें राज्यों के संविधान का उल्लेख किया है, अब भाग III में राज्यों के लिए अनुच्छेद 211-क के उपबंधों के अधीन स्वतः ही लागू होंगे। लेकिन यह महसूस किया गया है कि भारतीय राज्यों जो कि भाग III में होंगे, के मामले में भाग VI को लागू करने में अन्य विशेष परिस्थितियाँ हैं। जिनके लिए कुछ उपबंध