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भारतीय रियासतों के शासकों के अधिकार और विशेषधिकार ‘‘कि अनुच्छेद 302
के बाद, निम्नलिखित नया अनुच्छेद अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
302क संसद या किसी राज्य के विधानमंडल द्वारा कानून बनाने की शक्ति
का प्रयोग करने में या संघ या राज्य की कार्यपालक शक्ति का प्रयोग करने में
भारतीय रियासत के शासक के वैयक्तिक अधिकारों और गरिमा के संबंध में
इस संविधान के अनुच्छेद 367क में उल्लिखित ऐसे किन्हीं करार या समझौते
में दी गई गारंटी या आश्वासन का यथोचित सम्मान किया जाएगा।’’
‘‘कि अनुच्छेद 306 के बाद, निम्नलिखित नए अनुच्छेद अंतःस्थापित किए जाएँः-
‘‘306ख. इस संविधान में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इसके आरंभ होने
के दस वर्षों की अवधि या उससे अधिक या कम अवधि जैसा कि संसद
कानून द्वारा उस राज्य के संबंध में विहित करे, पहली अनुसूची के भाग
III में वर्तमान में विनिर्दिष्ट प्रत्येक राज्य की सरकार समय-समय पर राष्ट्रपति
द्वारा जारी ऐसे विशेष निदेशों के सामान्य नियंत्रण के अधीन रहेगा और
उनका पालन करेगा तथा ऐसे निदेशों का पालन करने में विफल रहने को इस
संविधान के उपबंधों के अनुसार सरकार चलाने में विफल माना जाएगा।
‘‘परंतु राष्ट्रपति आदेश के द्वारा यह निदेश दे सकेगा कि इस अनुच्छेद के
उपबंध आदेश में विनिर्दिष्ट किसी राज्य के मामले में लागू नहीं होगा।’’
‘‘कि अनुच्छेद 258 के खंड (1) के स्थान पर, निम्नलिखित खंड प्रतिस्थापित
किया जाएः-
(1) इस अध्याय में अंतर्विष्ट किसी बात के रहते हुए भी भारत सरकार इस
अनुच्छेद के खंड (2) के उपबंधों के विषयाधीन पहली अनुसूची के भाग
III में वर्तमान विनिर्दिष्ट किए जा रहे किसी राज्य की सरकार के साथ
निम्नलिखित के संबंध में समझौता कर सकती है।
(क) ऐसे राज्य में भारत सरकार द्वारा उदग्रहणीय कोई कर या शुल्क का उद्ग्रहण
और संग्रहण और आगमों के वितरण जो कि इस अध्याय के उपबंधों के
अनुसार अन्यथा न हो_
(ख) ऐसे राज्य के राजस्व का नुकसान हो जाने पर जो कि वह राज्य इस संविधान
के अधीन भारत सरकार द्वारा या किसी अन्य संसाधनों से उद्ग्रहणीय कोई