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92 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अनुच्छेद 48

1 श्री एच.वी. कामतः डॉ. अम्बेडकर ने जब मुझे उस दिन उत्तर दिया था तो उनके विचार बड़े ही स्पष्ट थे, लेकिन अब लगता है कि उनके अपने मन में ही कुछ संशय व्याप्त है और अब एक संशोधन लेकर आए हैं जिसमें राज्यपालों और राष्ट्रपति को किरायामुक्त आवास देने की बात कही गई है। हमें तर्कपूर्ण ढंग से आगे बढ़ना चाहिए और मंत्रियों को भी किराया मुक्त आवास मुहैया कराना चाहिए।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, यदि मुझे कहने की अनुमति हो, तो कुछेक शब्द कह सकता हूँ। यह संशोधन तो उस उपबंध का महज परिणामी या सदृश्य है जो हमने राजप्रमुखों के संबंध में किया है। हमने राजप्रमुखों के आवासों के संबंध में उस दिन प्रस्तुत किए गए खंडों में निश्चय ही यह कहा है कि वे आवास किराया मुक्त होंगे। राज्यपालों से संबंधित उसी प्रकार के खंडों की तुलना करने पर हमने पाया कि हमसे किसी प्रकार की चूक हो गई और हमने किराया मुक्त आवास के बारे में उल्लेख नहीं किया था। उस कमी को दूर कर लेना अच्छा है तथा राज्यपालों और राष्ट्रपति को राजप्रमुखों की स्थिति के अनुरूप लाने के लिए इस संशोधन की जरूरत है।

मंत्रियों से संबंधित मुद्दा संसद द्वारा बनाए गए कानून के द्वारा विनियमित होगा। क्या संसद उन्हें आवास के साथ वेतन देने के लिए तैयार होगी और यदि आवास वेतन दिया जाएगा तो फिर आवास किराया मुक्त रहेगा अथवा उस पर किराया लगेगा, ये सारे मुद्दे संसद द्वारा विनियमित होंगे, क्योंकि मंत्रियों का पद राजनीतिक पद है जो कि सभा सद्भाव तथा विश्वास पर निर्भर है और मुझे लगता है कि श्री कामत इस बात को बड़ी आसानी से समझेंगे कि मंत्रियों को संसद की समीक्षा और अधिकारिता से अलग रखना समुचित है।

श्री सभापतिः मैं इस पर मतदान लूँगा।

प्रस्ताव हैः

‘‘अनुच्छेद 48 के खंड (3) में, ‘राष्ट्रपति को सरकारी आवास मुहैया कराया जाएगा’ शब्दों के स्थान पर ‘राष्ट्रपति किराया मुक्त सरकारी आवास का उपयोग करने का हकदार होगा’ शब्द प्रतिस्थापित किए जाएँ।’’

[ संशोधित अस्वीकृत हुआ। ]

श्री सभापतिः फिर भी मैं श्री टी.टी. कृष्णमाचारी द्वारा प्रस्तुत संशोधन

1 सी.ए.डी खंड 10, 14 अक्तूबर, 1949 पृष्ठ 268