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को रखता हूँ।
प्रस्ताव हैः
‘‘अनुच्छेद 48 के खंड (3) में, राष्ट्रपति को सरकारी आवास मुहैया कराया जाएगा’ शब्दों के स्थान पर ‘राष्ट्रपति सरकारी आवास जो किराया मुक्त होगा, का उपयोग करने का हकदार होगा’ शब्द प्रतिस्थापित किए जाएँ।’’
संशोधन स्वीकृत हुआ।
श्री टी.टी. कृष्णमाचारीः महोदय, मैं संशोधन संख्या 360 प्रस्तुत करता हूँ।
‘‘कि अनुच्छेद 62 का खंड (5क) का लोप किया जाए।
इसका कारण यह है कि जैसा कि मैं सभा को डॉ. अम्बेडकर की ओर से उस दिन बता चुका हूँ कि हम अनुसूची III क और साथ ही वह अनुसूची जो राज्यपालों से संबंधित हैं, को प्रस्तुत करने का प्रस्ताव नहीं करते हैं। प्रस्ताव में खंड इस प्रकार हैः (5क) राष्ट्रपति अपने मंत्रियों को चुनने और अपने अन्य कृत्यों का निर्वहन करने के लिए अनुसूची III क निर्धारित अनुदेशों से सामान्यतः दिशा-निर्देश प्राप्त करेगा।’’ चूंकि अनुसूची III क वस्तुतः प्रस्तुत नहीं किया गया है, यह खंड फालतू हो गया है। इसलिए मैंने इसका लोप किए जाने का प्रस्ताव किया है।
श्री एच.वी. कामथः महोदय, आपको याद होगा कि कुछ महीने पहले आपने महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया था कि क्या राष्ट्रपति अपनी मंत्री परिषद की सलाह मानने के लिए हमेशा बाध्य रहेगा। हमारा संविधान उस बारे में मौन है। इसमें केवल यह कहा गया है कि राष्ट्रपति की सहायता और उसे सलाह देने के लिए एक मंत्री परिषद होगी। डॉ. अम्बेडकर ने उस समय संविधान में कुछ उपबंध अंतःस्थापित करने की बात कहीं थी कि इस मुद्दे को स्पष्ट किया जा सके। मुझे तो इतना याद है। सभापति महोदय, मुझे कृपया बताएँ कि मैं सही हूँ या गलत। प्रारुप संविधान में कहीं भी इस मुद्दे को स्पष्ट नहीं किया गया है। मैं आशा करता हूँ कि डॉ. अम्बेडकर इसे स्पष्ट करेंगे और वर्तमान की तरह इसे अस्पष्ट नहीं रहने देंगे।
1 माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः महोदय, मुझे इसके बारे में सूचना दी गई होती तो मैं आवश्यक अंश उद्धृत कर सकता था। लेकिन मैं एक सामान्य वक्तव्य दे सकता हूँ। मुद्दा यह है कि क्या संविधान में कुछ भी ऐसा अंर्तनिहित है, जो राष्ट्रपति
1 सी.ए.डी. खंड 10, 14 अक्तूबर, 1949, पृष्ठ 269-270