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94 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

को मंत्री की सलाह स्वीकार करने के लिए बाध्य करता है, वास्तव में सामान्य प्रश्न की तुलना में बड़ा ही छोटा प्रश्न है। मैं सामान्य प्रश्न के बारे में कुछ बताना चाहता हूँ।

जहाँ तक संसदीय लोकतंत्र का संबंध है, प्रत्येक संविधान में राज्य के तीन अलग-अलग अंगों -कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका का उपबंध किया जाना जरूरी होता है। मुझे किसी भी संविधान में ऐसा कोई उपबंध नहीं मिला है जो यह कहता हो कि कार्यपालिका की आज्ञा मानेगा, न ही मैंने किसी संविधान में ऐसा उपबंध देखा है कि कार्यपालिका न्यायपालिका की आज्ञा का पालन करेगा। ऐसा उपबंध कहीं भी देखने को नहीं मिलता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आमतौर पर यह माना जाता है कि संविधान के विभिन्न उपबंधों को मानना राज्य के अलग-अलग अंगों के लिए बाध्यकारी है। परिणामतः यह धारणा बनती है कि संविधान को लागू करने वाले लोग, विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका की जिम्मेदारी संभालने वाले लोग अपने कार्यों, अपनी सीमाओं और अपने कर्तव्यों के बारे में जानते हैं। इसलिए यह उम्मीद की जाती है कि यदि कार्यपालिका संविधान के अनुरूप ईमानदारीपूर्वक कार्य करती है तो वह संविधान में किसी प्रकार की निर्धारित अनिवार्य बाध्यता के बिना ही विधायिका की बात मानने के लिए बाध्य होगी।

उसी प्रकार से, यदि कार्यपालिका संविधान के अनुरूप कार्य करने के प्रति ईमानदार है, तो उसे उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए न्यायिक निर्णयों के अनुरूप कार्य करना होगा। इसलिए मेरा यह मानना है कि यह राज्य के किसी अंग का अपनी सीमाओं में रहकर तथा राज्य के दूसरे अंगों की श्रेष्ठता का पालन करने का मामला है। संविधान द्वारा सर्वोच्चता संवैधानिक दायित्वों से जुड़ा मामला है जो संविधान में बिल्कुल स्पष्ट है।

महोदय, मुझे याद है कि आपने यह प्रश्न उठाया था और मैं ऊपर देखने लगा था तथा मेरे पास किंग बेंच के दो निर्णय हैं जिन्हें मैं लाकर सभा में दिखाना चाहता था ताकि यह मुद्दा बिल्कुल स्पष्ट हो सके। लेकिन मुझे खेद है कि इस मुछ्दे को उठाए जाने के बारे में मुझे कोई सूचना नहीं थी। लेकिन जो मुद्दा उठाया गया है उसका उत्तर यही है।

किसी भी देश में कोई भी संवैधानिका सरकार तब तक नहीं चल सकती जब तक कोई भी संवैधानिक प्राधिकारी इस तथ्य को याद नहीं रखे कि उसके प्राधिकार संविधान द्वारा सीमित किया गया है और यदि संविधान द्वारा प्राधिकारों के बीच निर्णय देने के लिए किसी प्राधिकारी का सृजन किया गया हो तो उस प्राधिकारी का निर्णय राज्य के अन्य अंगों के लिए बाध्यकारी होगा। इस संविधान के द्वारा जो यह उपबंध किया गया है कि राष्ट्रपति अपने मंत्रियों की सलाह को मानेगा, उसका उद्देश्य यह