अनुच्छेद 264क - Page 116

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माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं समझता हूः सिरोही प्रांतीयत्तर अधिकारिता अधिनियम, 1947 के अधीन आंशिक तौर पर बंबई के द्वारा तथा राजस्थान के द्वारा शासित होता है। यही कारण है कि इसका अलग से उल्लेख नहीं किया गया है।

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अनुच्छेद 264क

1 माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं संशोधन संख्या 425 प्रस्तुत करता हूँः

‘‘कि सूची XIII के संशोधन संख्या 307 (दूसरे सप्ताह) में प्रस्तावित अनुच्छेद 264क के स्थान पर निम्नलिखित अंतःस्थापित किए जाएँ - (1) राज्य की कोई विधि, माल के क्रया विक्रय पर, जहाँ ऐसा क्रय या विक्रय

के बारे में निर्बधन।

(क) राज्य के बाहर, या

(ख) भारत के राज्यक्षेत्र में माल के आयात या उसके बाहर निर्यात के दौरान होता

है वहाँ कोई कर अधिरोपित नहीं करेगी या अधिरोपित करना प्राधिकृत नहीं

करेगी।

(2) संसद, यह निर्धारित करने के लिए कि माल का क्रय या विक्रय खंड (1)

में वर्णित रीतियों में से किसी रीति से कब होता है, विधि द्वारा सिद्धांत

बना सकगी।

(3) जहाँ तक किसी राज्य की कोई विधिः-

(क) ऐसे माल के, जो संसद द्वारा विधि द्वारा अंतराज्यिक व्यापार या वाणिज्य

में विशेष महत्व का माल घोषित किया गया है, क्रय या विक्रय पर कोई

कर अधिरोपित करती है या कर का अधिरोपण प्राधिकृत करती है_ या (ख) माल के क्रय या विक्रय पर ऐसा कर अधिरोपित करती है या ऐसे कर का

अधिरोपण प्राधिकृत करती है, जो अनुच्छेद 366 के खंड (29क) के उपखंड

(ख), उपखंड (ग) या उपखंड (घ) में निर्दिष्ट प्रकृति का कर है,

वहाँ तक वह विधि, उस कर के उद्ग्रहण की पद्धति दरों और अन्य प्रसंगतियों के संबंध में ऐसे निबंधनों और शर्तों के अधीन होगी जो संसद विधि द्वारा विनिर्दिष्ट करे।

1 सी.ए.डी. खंड 10, 16 अक्तूबर, 1949, पृष्ठ 325-327