अनुच्छेद 264क - Page 117

102 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

महोदय, प्रत्येक व्यक्ति जानता है कि बिक्री कर के कारण पूरे भारत में व्यापार और वाणिज्य की स्वतंत्रता के मामले में कठिनाई पैदा हुई है। ऐसा पाया गया है कि विभिन्न प्रांतीय सरकारों द्वारा वसूल किए जाने वाले बहुत सारे बिक्री करों से या तो सामानों में कटौती होती है, जो कि आयात या निर्यात के विषयगत होते हैं या फिर अंतर्राज्यीय व्यापार या वाणिज्य में कटौती होती है। इस बात पर सहमति है कि इस प्रकार की अव्यवस्था फैलाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिएं और जहाँ प्रांतों को बिक्री कर लगाने की स्वतंत्रता होनी चाहिए, वहीं कुछ विनियम भी होने चाहिए जो प्रांतों द्वारा लगाए जाने वाले बिक्री कर में शामिल मंशा के अनुरूप है। इसलिए, यह महसूस किया गया कि बिक्री कर लगाने की प्रांतों की शक्ति पर कतिपय सीमाएँ निर्धारित करने वाले कुछ विशिष्ट उपबंध होने चाहिए।

सभा को जो पहली बात मैं बताना चाहता हूँ कि वह यह है कि इस अनुच्छेद 264क में कतिपय उपबंध ऐसे हैं जो संविधान के विभिन्न भागों के महज पुनःप्रस्तुति है। उदाहरण के लिए अनुच्छेद 264क के उपखंड (1), जैसा कि मेरे द्वारा प्रस्ताव किया गया है, में उपखंड (ख) संविधान, विधायी सूची की प्रविष्टि में अंतर्विष्ट अनुच्छेद का महज पुनःप्रस्तुति है, के आयात और निर्यात पर कर लगाने का अधिकार पूरी तरह से केंद्रीय सरकार का होगा। परिणामतः जहाँ तक उपखंड (1) (ख) संबंध है, इस बारे में कोई विवाद नहीं हो सकता कि यह राज्यों के बिक्री कर के रूप में लेवी लगाने के अधिकार का एक प्रकार से अतिक्रमण है।

उसी प्रकार से उपखंड (2) भाग X क जिसे हमने अभी हाल ही में पारित किया है और जो कि अंतर्राज्यीय व्यापार और वाणिज्य से संबंधित उपबंधों के बारे में है, महज एक पुनःप्रस्तुति है। इसलिए जहाँ तक उपखंड (2) का संबंध है, उसमें नया कुछ भी नहीं है। इसमें सिर्फ यह कहा गया है कि यदि किसी प्रकार का बिक्री कर लगाया जाता है तो वह भाग X क के उपबंधों के विपरीत नहीं होना चाहिए।

उपखंड (3) के संबंध में इस बात पर सहमति हुई है कि कुछ वस्तुएँ ऐसी हैं जो पूरे भारतवर्ष के सामुदायिक जीवन के लिए इतनी अनिवार्य हैं कि उन्हें उस प्रांत जिनमें वे पाए जाते हैं, द्वारा उन पर बिक्री कर लगाए जाने का विषयाधीन नहीं रखा जाना चाहिए। इसलिए, यह महसूस किया गया कि ऐसा कोई भी सामान है जोकि पूरे भारत के सामुदायिक जीवन के लिए अनिवार्य हो तो फिर यह आवश्यक है कि संबंधित प्रांत द्वारा ऐसी किसी वस्तु पर कोई कर लगाया जाए, प्रांत द्वारा बनाए गए कानून को राष्ट्रपति से स्वीकृति मिलनी चाहिए ताकि राष्ट्रपति और केंद्रीय सरकार के लिए यह देखना संभव हो सके कि किसी प्रांत विशेष द्वारा प्रस्तावित विशेष प्रकार के लेवी लगाए जाने के कारण लोगों के सामने कठिनाई उत्पन्न न हो।