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अनुच्छेद 280क
1 माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः
‘‘कि अनुच्छेद 280 के बाद निम्नलिखित नया अनुच्छेद जोड़ा जाएः-
यदि राष्ट्रपति जी इस बात से संतुष्ट हो जाते हैं कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो
गई है, जिससे भारत या उसके राज्यक्षेत्र के किसी भाग का वित्तीय स्थायित्व
या प्रत्यय संकट में है तो वह उद्घोषण द्वारा इस आशय की घोषणा कर
सकेंगे।
(2) खंड (1) के अधीन की गई उदघोषणा -
(क) किसी पश्चात्वीं उद्घोषणा द्वारा वापस ली जा सकेगी या परिवर्तित की जा
सकेगी_
(ख) संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी_
(ग) दो मास की समाप्ति पर, प्रवर्तन में नहीं रहेगी यदि उस अवधि की समाप्ति
से पहले संसद के दोनों सदनों के संकल्पों द्वारा उसका अनुमोदन नहीं कर
दिया जाता है_
परंतु यदि ऐसी उदघोषणा उस सयम की जाती है जब लोक सभा का विघटन
हो गया है या लोक सभा का विघटन उपखंड (ग) में निर्दिष्ट दो मास की
अवधि के दौरान हो जाता है और यदि उद्घोषणा का अनुमोदन करने वाला
संकल्प राज्य सभा द्वारा पारित कर दिया गया है, किंतु ऐसी उदघोषणा के
संबंध में कोई संकल्प लोक सभा द्वारा उस अवधि की समाप्ति से पहले
पारित नहीं किया गया है, तो उदघोषणा उस तारीख से, जिसको लोक सभा
अपने पुनर्गठन के पश्चात् प्रथम बार बैठती है, तीस दिन की समाप्ति पर
प्रवर्तन में नहीं रहेगी। यदि उक्त तीस दिन की अवधि की समाप्ति से पहले
उद्घोषणा का अनुमोदन करने वाला संकल्प लोक सभा द्वारा भी पारित नहीं
कर दिया जाता है।
(3) उस अवधि के दौरान, जिसमें खंड (1) में उल्लिखित उदघोषणा प्रवृत्त रहती
* सी.ए.डी खंड 10, 10 अक्तूबर, 1949 पृष्ठ 361