अनुच्छेद 280क - Page 131

116 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री सभापतिः मैं संशोधन पर मत लूँगाः

{ संशोधन अस्वीकृत हुआ। }

मैं अनुच्छेद 112 जोकि प्रस्तावित संशोधन संख्या 421 में है। प्रस्ताव हैः

‘‘कि अनुच्छेद 112 के लिए सूची XV के संशोधन संख्या 364 (दूसरे सप्ताह), के संदर्भ में, निम्नलिखित अनुच्छेद प्रतिस्थापित किया जाएः-

112 (1) ‘‘इस अध्याय में किसी बात के होते हुए भी, उच्चतम न्यायालय

अपने विवेकानुसार भारत के राज्यक्षेत्र में किसी न्यायालय या अधिकरण द्वारा

किसी वाद या मामले में पारित किए गए या दिए गए किसी निर्णय, डिक्री,

अवधारण, दंडादेश की अपील के लिए विशेष इजाजत दे सकेगा। अपील के

लिए उच्चतम न्ययालय की विशेष इजाजत।

(2) ‘‘खंड (1) की कोई बात सशस्त्र बलों से संबंधित किसी विधि द्वारा

या उसके अधीन गठित किसी न्यायालय या अधिकरण द्वारा पारित किए गए

या दिए गए निर्णय, अवधारण, दंडादेश या आदेश को लागू नहीं होगी।’’

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।

[ अनुच्छेद 112, यथासंशोधित रूप में, संविधान में जोड़ा गया। ]

* * * * *

1 श्री सभापतिः अब हम लोग खंडों के अंत में पहुँच गए हैं और 4 या 5

खंडों के ऊपर हमें झगड़ने की जरूरत नहीं है।

माननीय श्री के. संथानमः लेकिन यहाँ पर प्रस्तुत किए गए कुछ संशोधनों में काफी अधिक सार है और मेरे विचार से उनके बारे में विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। यह मैं आप पर छोड़ता हूँ महोदय। लेकिन, जहाँ तक इसका संबंध है मेरे विचार से ‘‘संसद द्वारा बनाए गए’’ शब्द अर्थ को सटीक और स्पष्ट करने की दृष्टि से बिल्कुल ही अनिवार्य है।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (बबंईः जनरल)ः महोदय, मेरे मित्र श्री संथानम द्वारा प्रस्तुत संशोधन बिल्कुल अनावश्यक है। उन्होंने यह संशोधन इसलिए प्रस्तुत किया है क्योंकि वह अनुच्छेद 7 में अंतर्विष्ट उपबंधों पर ध्यान देना भूल गए हैं। अनुच्छेद 60 कहता है कि संघ की कार्यपालक शक्ति उन सभी मामला ें तक विस्तारित होगी जिन पर संसद के पास कानून बनाने की शक्ति मौजूद है बशर्ते यह तब विस्तारित