नए अनुच्छेद 302 क क क - Page 136

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1 श्री सभापतिः फिर हम नया अनुच्छेद 302क कक अर्थात् संशोधन संख्या 450 लेते हैं। श्री संथानम ने एक सुझाव दिया है कि अभी-अभी पारित संशोधन को पूरा करने के लिए समवर्ती सूची में न्यायालय की अवमानना शब्द शामिल किए जाने चाहिएँ और मेरे विचार से यह परिणामी है और हमारे लिए बेहतर है कि हम उसे लें।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं सीधे संशोधन प्रस्तुत करूँगा।

‘‘कि समवर्ती सूची में प्रविष्टि 15 के बाद, निम्नलिखित प्रविष्टि जोड़े जोड़ी जाएँः’

‘‘15क, न्यायालय की अवमानना’’

श्री सभापतिः मैं नहीं समझता कि उस पर कोई आपत्ति हो सकती है।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः ऐसी सारी चीजें हो सकती हैं।

श्री सभापतिः हो सकता है, लेकिन वह समय आने पर हो जाएगा। अतः मैं इस पर मत लूँगा।

उपर्युक्त संशोधन स्वीकृत हुआ।

[ प्रविष्टि 15क समवर्ती सूची में जोड़ा गया। ]

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नए अनुच्छेद 302 क क क

2 माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं समझता हूँ कि मेरे मित्र सिधवा ने स्थिति को पूरी तरह से गलत समझा है। दि वह अनुसूची सात, मद 30 और 35 जो मेरे मित्र श्री टी.टी. कृष्णमाचारी द्वारा प्रस्तुत किए गए संशोधन में शामिल मामलों से संबंधित है, को देखें तो वह पाएँगे कि मद 30 और 35 के अधीन केंद्र को प्रदान की गई कानून बनाने की शक्ति के अधीन दी गई शक्ति का प्रयोजन विमान यातायात के विनियमन और संचालन है। मद 35 के अधीन दी गई शक्ति का प्रयोजन संविधान का परिसीमन और महापत्तन प्राधिकारियों को शक्ति प्रदान करना है। वह आसानी से इस बात को देख सकते हैं कि विमान क्षेत्रों और महापत्तनों में शामिल क्षेत्र का जहाँ तक संबंध है यह प्रांत के क्षेत्र का भाग है और परिणामतः राज्य द्वारा कवर किए गए क्षेत्र लागू होता है। जो प्रविष्टियों के अधीन केंद्रीय सरकार के दायरे में आते हैं, के बारे में कानून बनाने की शक्ति नहीं प्रदान करती है। इसलिए, इस अनुच्छेद में यह प्रस्ताव किया गया हैः कि जहाँ यह विमान क्षेत्रों और महापत्तनों द्वारा कवर किए गए क्षेत्रों को प्रांतों के क्षेत्र के भाग के रूप में बनाए रखता है। यह उन्हें अलग नहीं करता है। 12 सी.ए.डी. खंड 10, 17 अक्तूबर, 1949, पृष्ठ 403सी.ए.डी. खंड 10, 17 अक्तूबर, 1949, पृष्ठ 405-406