122 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
यह सूची II में अंतर्विष्ट किन्हीं मदों के अधीन राज्यों को कानून बनाने की शक्ति बनाए रखता है, ताकि यह हवाई अड्डों और महापत्तनों द्वारा कवर किए गए क्षेत्रों पर लागू हो सके। संशोधन यह कहता है कि यदि केंद्रीय सरकार यह मानती हो कि राज्य जिसके क्षेत्राधिकार में कोई हवाई अड्डा या महापत्तन अवस्थित है, में उसके द्वारा बनाए गए कानून को लागू नहीं किया गया है तो राष्ट्र के लिए खुला विकल्प होगा कि वह कह सकता है कि राज्य का यह विशेष कानून इस या उस या किसी अन्य अधिसूचना के विषयाधीन हवाई अड्डा या महापत्तन पर लागू होगा। उसके अधिक केंद्र द्वारा सूची II में अंतर्विष्ट प्रविष्टियों जो कानून बनाने के मामले में राज्यों के क्षेत्र में अतिक्रमण नहीं किया जाएगा। मुझे आशा है कि मेरे मित्र श्री सिधवा अब अपनी आपत्ति वापस ले लेंगे।
श्री सभापतिः मैं अब संशोधन संख्या 450 पर मत लूँगा।
प्रस्ताव हैः
कि अनुच्छेद 302कक के बाद निम्नलिखित नया अनुच्छेद अंतःस्थापित किया
जाएः-
(1) 302 ककक इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी, राष्ट्रपति लोक
अधिसूचना द्वारा निदेश दे सकेगा कि ऐसी तारीख से, जो उस अधिसूचना में
विनिर्ष्टि की जाए - महापत्तनों और विमानक्षेत्रों के बारे में विशेष उपबंध। (क) संसद या किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा गई कोई विधि या किसी
महापत्तन या विमानक्षेत्र पर लागू नहीं होगी अथवा ऐसे अपवादों या उपांतरणों
के अधीन रहते हुए लागू होगी जो उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएँ_
या
(2) इस अनुच्छेद में
(क) ‘‘महापत्तन’’ से ऐसा पत्तन अभिप्रेत है जिसे संसद द्वारा बनाई गई किसी
विधि या किसी विद्यमान विधि द्वारा या उसके अधीन महापत्तन घोषित
किया गया है और इसके अंतर्गत ऐसे सभी क्षेत्र हैं जो उस समय ऐसे पत्तन
की समीओं के भीतर हैं_
(ख) ‘‘विमानक्षेत्र’’ से वायु मार्गों, वायुयानों और विमान चालन से संबंधित
अधिनियमितियों के प्रयोजनों के लिए यथा परिभाषित अभिप्रेत है।
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।
[ अनुच्छेद 302 ककक संविधान में जोड़ा गया। ]
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