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और आत्मार्पित करते हैं से अलग कर देना चाहिए। इसे उस तरीके से पढ़ना....
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श्री महावीर त्यागीः इसमें लोग कहाँ से आते हैं? इसमें संविधान सभा के सदस्य शामिल हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः वह एक अलग मामला है। मैं इस समय एक छोटे से मुद्दे पर चर्चा कर रहा हूँः क्या यह संविधान यह कहता है या नहीं कहता है कि यह संविधान लोगों के द्वारा तैयार अंगीकृत और अधिनियमित किया गया है। मेरे विचार से कोई भी जो इसकी सरल भाषा को अन्य भागों अर्थात् वर्णनात्मक और उद्देश्यपरक माँगों से अलग नहीं करके पढ़ेगा, उसके मन में प्रस्तावना के अर्थ को लेकर कोई संशय नहीं रह जाएगा।
अब मेरे मित्र श्री त्यागी ने कहा कि यह संविधान लोगों के समूह जिन्हें लघु मतदान के आधार पर निर्वाचित किया गया है, द्वारा पारित किया जा रहा है। यह बिल्कुल सही है कि यह इस अर्थ में एक संविधान सभा नहीं है, इसमें देश का प्रत्येक वयस्क पुरुष और स्त्री को शामिल नहीं किया गया है। लेकिन यदि मेरे मित्र श्री त्यागी यह चाहते हो कि यह संविधान तब तक प्रभावी नहीं हो जब तक इसे जनमत संग्रह के रूप में लोगों को सौंप नहीं दिया जाता है, तो यह बिल्कुल एक अलग प्रश्न बन जाता है जिसे इस मुद्दे से कुछ भी लेना नहीं है जिस पर हम बहस कर रहे हैं कि क्या यदि इस संविधान सभा द्वारा पारित संविधान को वैध माना जाना चाहिए या फिर इसे वैध तभी माना जाना चाहिए जब इसे जनमत संग्रह के आधार पर पारित किया जाए। वह बिल्कुल ही अलग मामला है। इसे बहस के इस मुद्दे से कुछ लेना-देना नहीं है। बहस का मुद्दा यह हैः क्या यह संविधान इस बात को स्वीकार करता है, मान्यता देता है और घोषित करता है अथवा नहीं कि यह लोगों से बना है? मैं कहता हूँ कि यह ऐसा करता है।
मैं चाहता हूँ कि सदस्यगण संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान की प्रस्तावना पर भी विचार करें। मैं इसके कुछ अंश को पढ़ूँगा। इसमें कहा गया हैः ‘‘हम संयुक्त राज्य के लोग’’ - मैं अन्य भागों को नहीं पढ़ रहा हूँ - ‘‘हम संयुक्त राज्य के लोग, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए यह संविधान बनाते हैं और इसे स्थापित करते है।’’ जैसा कि बहुत सारे सदस्य जानते हैं कि वह संविधान बहुत ही छोटे निकाय के द्वारा प्रारुपित किया गया था। मैं अभी राज्यों का सही ब्यौरा और संख्या भूल रहा हूँ, जिसने उस छोटे निकाय, जिसकी बैठक फिलाडेल्फिया मे संविधान का निर्माण करने के लिए हुई थी,
* डाट्स व्यवधान को दर्शाता है।