नए अनुच्छेद 302 क क क - Page 145

130 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

ने यह निर्णय लिया कि पाठक और सभा के सदस्यों को इस बारे में संपूर्ण आभास दिलाने की किस विषय से कौन सा अनुच्छेद संबंधित है, कतिपय अनुच्छेदों को एक भाग से हटाकर दूसरे भाग, एक अध्याय से हटाकर दूसरे अध्याय में डालना आवश्यक है ताकि सुविधानुसार उनका अगला समूह तैयार किया जा सके, और उन्हें बेहता समझ से संभालने के लिए एक साथ रखा जा सके तथा संविधान की विषय-वस्तु को बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया जा सके। प्रतिवेदन में किए गए दूसरे प्रकार के परिवर्तन पूरी तरह से औपचारिक और परिणामी हैं, जैसा कि ‘‘इस संविधान के’’ शब्दों, जो कि विभिन्न स्थानों पर आया है, को हटाकर दिया जाना। कभी-कभी बड़े अक्षरों को छोटे अक्षरों में मुद्रित कर दिया गया है और शुद्धिपत्र तैयार करना पड़ा है। शासक और राजप्रमुख के संदर्भ में अन्य परिवर्तन इसलिए करने पड़े, क्योंकि ये परिवर्तन अंत में करने पड़े थे, जब हम परिभाषा संबंधी खंडों पर चर्चा कर रहे थे। अन्य परिवर्तनों को संक्षेप में आवश्यक परिवर्तन कहा जा सका है। अब इन आवश्यक परिवर्तनों के दो वर्ग हैं वे परिवर्तन, जिनमें अनुच्छेद के अंदर व्यापक परिवर्तन नहीं किए गए हों। ये परिवर्तन आवश्यक हो गए, क्योंकि यह पाया गया कि गत सत्र में जब उन अनुच्छेदों को पारित किया गया था, कुछ अनुच्छेदों के अर्थ स्पष्ट नहीं हो पाए थे या फिर कुछ कमी रह गई थी जिसे सही करना जरूरी है। उन परिवर्तनों से प्रभावित अनुच्छेदों की विषय वस्तु में बिना व्यापक फेर बदल के इसे सही करने का प्रयास किया है। जबकि अन्य अनुच्छेद भी हैं, जिनमें आवश्यक परिवर्तन किए गए हैं, लेकिन वे परिवर्तन व्यापक परिवर्तन हैं। प्रारुप समिति में यह महसूस किया कि ये परिवर्तन जरूरी हैं, यद्यपि वे व्यापक परिवर्तन हैं, क्योंकि ऐसा नहीं करने से गत सत्र में पारित अनुच्छेदों में विभिन्न दोष या कमी व्याप्त रह जाती, इसलिए प्रारुप समिति ने इस प्रकार के परिवर्तन सुझाने की जिम्मेदारी ली है। जो कि पैराग्राफ-2 के उपखंड (2) में उल्लिखित है और मुझे आशा है कि यह सभा उन परिवर्तनों को स्वीकार करने पर सहमत होगी। व्यापक परिवर्तन के संबंध में पैराग्राफ-4 के अन्तर्गत पर्याप्त स्पष्टीकरण दे दिए गए हैं और अब मुझे यह दोहराने की जरूरत नहीं है जो उन परिवर्तनों के औचित्य के संदर्भ में, प्रतिवेदन में कहा गया है।

महोदय, मेरे विचार से प्रारुप समिति के प्रतिवेदन में कुछ भी जोड़ना आवश्यक नहीं है और मैं आशा करता हूँ कि सभा प्रतिवेदन तथा प्रतिवेदन के साथ-साथ सूची-2 में प्रारुप समिति द्वारा सुझाए गए परिवर्तनों, जो सभा के सदस्यों को परिचालित किए जा चुके हैं, स्वीकार करेगी।

* डाट्स व्यवधान को दर्शाता है।