132 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
पं. हृदय नाथ कुँजरूः मैं अपने माननीय मित्र की बात में हस्तक्षेप करना चाहता हूँ। अनुच्छेद 306 ख पहली अनुसूची के भाग ख में शामिल राज्यों की सरकारों पर केंद्रीय कार्यपालिका की शक्ति लागू होने से ही संबंधित है। मेरे माननीय मित्र ने केंद्रीय कार्यपालिका की उस शक्ति को सभी राज्यों की सरकारों पर लागू कर दिया है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (बंबई जनरल)ः यदि मेरे माननीय मित्र मुझे अपनी बात पूरी करने दें तो मैं अनुच्छेद 280 के वर्तमान प्रारुप वाला नहीं बल्कि पुराने प्रारुप वाले, जिसे दूसरे पठन के दौरान पारित किया गया था, को पढ़ना चाहूँगा। ये वित्तीय उपबंध हैं। अनुच्छेद 280 के खंड 5 में कहा गया है कि ‘‘इस अनुच्छेद के
खंड तीन के अधीन दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किए जाने को इस संविधान के उपबंधों के अनुसार राज्य सरकार को चलाने में विफल माना जाएगा।’’
इसलिए अनुच्छेद 365 में, अनुच्छेद 280क के खंड (5) को शामिल करने की माँग की गई है। मेरे माननीय मित्र अनुच्छेद 306 ख का उल्लेख फिर करें ...
पं. हृदय नाथ कुँजरूः क्या मेरे माननीय मित्र मुझे एक बार फिर बोलने की अनुमति देंगे?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं समझता हूँ कि बेहतर होगा कि मेरी बात पूरी हो जाने के बाद बोलें। यदि वह अनुच्छेद 306 ख का उल्लेख करते हैं, जो कि भाग 3 में उल्लिखित राज्य, जो कि अब पहली अनुसूची के भाग ख में है, को अनुदेश और निर्देश किए जाने के संबंध में है, वह पाएँगे कि इसके अंतिम भाग में कहा गया हैः ‘‘इस अनुच्छेद के खंड तीन के अधीन दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किए जाने को इस ‘‘संविधान’’ के उपबंधों के अनुसार राज्य सरकार को चलाने में विफल माना जाएगा।’’ इसलिए मेरा तर्क है कि अनुच्छेद 365 में कोई भी नया सिद्धांत नहीं लिया गया है। विभिन्न धाराओं को महज एक साथ लाया गया है, जिसमें निर्देश जारी करने की शक्ति प्रदान की गई है और सामान्य अर्थ में यह बताया गया है। कि जहाँ कहीं भी निर्देश जारी किए गए हों और राज्य उनके पालन में विफल रहते हैं तो राष्ट्रपति यह मान लेगा कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है कि इस संविधान के उपबंधों को लागू करने के मामले में राज्य विफल रहा है। केवल अनुच्छेद 256 और 257 में ही विशेष तौर पर यह नहीं बताया गया है कि संविधान के उपबंधों के अनुसार कार्य करने में विफल रहने की बात समझी जाए। इसमें केवल यह कहा गया है कि केंद्रों को केवल निर्देश देने की शक्ति है। इसलिए अनुच्छेद 280 क (5) और 306 ख में विनिर्दिष्ट सिद्धांत को नए अनुच्छेद 365
बिन्दु व्यवधान को दर्शाता है।