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में यदि विस्तारित किया गया है, तो वह केवल उन्हीं कुछ अनुच्छेदों के संबंध में किया गया है जिनके बारे में इस तथ्य का उल्लेख नहीं किया गया है। राष्ट्रपति की अनुमति से संविधान को लागू करने में शामिल किए गए और लिए गए प्रावधान। मेरा यह कहना है कि जहाँ संविधान में यह निर्देश जारी करने की शक्ति दी गई है कि संविधान के उपबंधों के अनुरूप कार्य करने में सरकार विफल रही है, ऐसा सही ठहरना जिससे अन्य अनुच्छेद निर्देश जारी करने की शक्ति अनुच्छेद 365 काफी भिन्न है। अनुच्छेद 365 के उपबंध सभा द्वारा, मेरा यह अनुरोध है कि उचित आपातकाल राष्ट्रीय के अधान जारी करने की शक्ति जब इसलिए चिंता या किसी हाल में इस पर आए उपबंधधों की घोषणा इस अनुच्छेद का दायरा इसलिए बढ़ाया गया। संविधान में अनुच्छेद को राष्ट्रपति करने के लिए ऐसे भारत पर होकर अथवा यह अनुच्छेद कार्यपालिका की वह शक्ति प्रदान करने का अवसर किया गया है, कतिपय आपात जिससे की ऐसा करने संविधान राज्यों से मामले में नहीं किया गया है। डॉ. अम्बेडकर ने अनुच्छेद 300 क ख एक उपबंधों को निर्धारित नहीं किया है। सामान्य कर दिया है और उन्हें अनुच्छेद 300 के कार्यपालिक के कर्तव्यों का व्यापक उल्लेख किया गया है। महोदय मेरा यह कहना है कि वह माँग संबंधित किसी भी प्रस्ताव और किसी भी रूप में अपूर्ण है। संविधान के साथ पहले से जो निर्णय लिया है, वह विश्वास नहीं करता कि उपबंध पहली अनुसूची के अनुसार किए इसलिए व्यापक संविधान सभा का कार्य का समाप्त नहीं किया जा सकता।
पंडित हृदय नाथ कुँजरूः मैं यह बताना चाहता हूँ कि डॉ. अम्बेडकर ने संविधान के अनुच्छेद 280 क और 306 ख के बारे में जो संदर्भ दिया है। वह विषय से संबंधित नहीं है। अनुच्छेद 280 क केवल वित्तीय आपातस्थिति से संबंधित है। उस अनुच्छेद के अधीन राष्ट्रपति द्वारा दी गई शक्ति का उपयोग तभी किया जा सकता है जब उसने यह घोषणा कर दी हो कि भारत या उसके किसी भाग की वित्तीय स्थिरता या साख पर
खतरा है। इसलिए, उस अनुच्छेद का दायरा बड़ा ही सीमित है। संविधान का एक दूसरा अनुच्छेद है जो राष्ट्रपति द्वारा आपात स्थिति की घोषणा तभी की जा सकती है जब भारत पर युद्ध या आंतरिक उपद्रव का खतरा मौजूद हो, लेकिन, ये अनुच्छेद उस शक्ति के विस्तार को सही नहीं ठहराते जिससे केंद्रीय कार्यपालिका कतिपय आपातस्थितियों में सभी मामलों में उपयोग न कर सके। अनुच्छेद 306 ख निश्चय ही पहली अनुसूची के भाग ख में उल्लिखित राज्यों के संदर्भ में संविधान में ऐसा कोई उपबंध नहीं किया गया है। डॉ. अम्बेडकर ने स्वयं ही यह स्वीकार किया है कि उन्होंने उनका सामान्यीकरण कर दिया है और यहाँ तक वह पहली अनुसूची के भाग ख में उल्लिखित राज्यों को भी अनुच्छेद 306
ख और 280 क के संदर्भ में केंद्रीय कार्यपालिका की शक्तियों के विस्तृत प्रयोग के अधीन ले आया है। महोदय, मेरा यह कहना है, कि यह तुलना अनुचित है और किसी भी दृष्टि