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विलोप हो गया होता तो अनुच्छेद 365 का कुछ औचित्य हो सकता था, किंतु अनुच्छेद 306 को इस संविधान से लोप नहीं किया गया है। यह अनुच्छेद 371 के रूप में मौजूद है, लेकिन मैं प्रारुप समिति द्वारा संशोधित संविधान में अनुच्छेद 371 की भाषाओं और पिछले महीने संविधान सभा द्वारा संशोधित संविधान के अनुच्छेद 306 ख के बीच तुलना कर पाया हूँ।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे सम्मानित मित्र आगे और कुछ कहें उससे पहले मैं यह कहना चाहता हूँ कि ऐसे निर्देशों का पालन करने में विफल रहने को इस संविधान के उपबंधों के अनुरूप कार्य करने में सरकार की विफलता मानी जाएगी। इन शब्दों को अनुच्छेद 371 जो मूल अनुच्छेद 306 ख के समान है से लोप कर दिया गया है।
पंडित हृदय नाथ कुँजरूः फिर मैं उस संबंध में स्वयं को सही कर लेता हूँ। यदि, मेरे माननीय मित्र, पंडित ठाकुर दास भार्गव के प्रस्ताव के अनुरूप अनुच्छेद 365 का लोप हो जाता है, तो फिर प्रारुप समिति अनुच्छेद 306 ख के पुराने प्रारुप को वापिस ला सकती है।
महोदय, इसके अलावा चूँकि इस प्रश्न का उल्लेख डॉ. अम्बेडकर ने किया है, इसलिए मैं यह कहना चाहता हूँ कि संविधान सभा द्वारा संशोधित संविधान का अनुच्छेद 306 ख जो संविधान के वर्तमान प्रारुप जिस पर अभी हम चर्चा कर रहे हैं, के अनुच्छेद 371 के समान है, की अवधि सीमित है। यह दस वर्षों के लिए ही लागू होगा और इस उपबंध को संविधान जिसका स्वरूप स्थाई होगा, के नए उपबंध लागू करने के लिए उचित नहीं ठहराया जा सकता।
महोदय, जब मेरे माननीय मित्र डॉ. अम्बेडकर ने अनुच्छेद 306 ख के प्रारुप में किए गए परिवर्तन के बारे में बताया, तो मैं अनुच्छेद 353 और 360 का जिक्र कर रहा था।
श्री एच.वी. कामथः क्या मैं बता सकता हूँ कि अनुच्छेद 371 में 10 वर्ष से अधिक समय का प्रावधान किया गया है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः ‘‘इस संविधान में किसी बात के रहते हुए भी इसकी शुरूआत होने के दस वर्षों की अवधि के दौरान या इससे अधिक अथवा कम अवधि जितना कि संसद कानून द्वारा उपबंध करें ...
1 सी.एडी. अधिकारिक प्रतिवेदन खंड * * * * * X 15 नवंम्बर, 1949, पृष्ठ 525, द्रविड पृष्ठ 536