अनुच्छेदों का संशोधन - Page 153

138 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

नाम बदलकर, आर्यावर्त्त, रखने की अनुमति नहीं दे सकते।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यह आर्यावर्त्त नहीं हो सकता, जैसा कि पार्टी उस पर अपना निर्णय दे चुकी है। मुझे विश्वास है कि बाबू पुरूषोत्तम दास टंडन उस पर गौर कर चुके होंगे।

माननीय पंडित गोविंद वल्लभ पंत (संयुक्त प्रांत जनरल)ः आप जिस बात को खारिज कर चुके हैं, उसे यूपी सरकार द्वारा आगे नहीं बढ़ाया जाएगा और न ही गवर्नर जनरल को स्वीकार्य होगा। हम सभी इस बात को मानते हैं।

श्री सभापतिः फिर वर्तमान में कुछ करने की जरूरत नहीं है।

माननीय पंडित गोविंद वल्लभ पंतः इस बात की सहमति बनी है कि डॉ. अम्बेडकर द्वारा सुझाए गए प्रस्ताव का संशोधित स्वरूप का एक विधेयक इस सत्र के समापन से पूर्व पारित हो जाएगा।

श्री सभापतिः यह डॉ. अम्बेडकर पर निर्भर है।

* * * * *

1 श्री सभापतिः अब हम लोग सभी संशोधन समाप्त कर चुके हैं और कोई किसी सामान्य चर्चा के लिए समय नहीं है। लेकिन वस्तुतः हम लोग उन सभी नियमों पर चर्चा कर चुके हैं, जो हमारे पास आए और जिन पर चर्चा की जरूरत थी। अतः डॉ. अम्बेडकर से विभिन्न संशोधनों पर हुई बहस का उत्तर देने का अनुरोध करूँगा।

श्री बहादुरः महोदय, मैं केवल एक बात का उल्लेख करना चाहता हूँ। मेरा यह अनुरोध है कि सिरोही के बारे में दिए गए आदेश को सभा के सामने रखा जाए, ताकि हम इसकी विषय वस्तु के बारे में जान सकें तथा यह भी जान सकें कि क्या यह सभा इसकी पुष्टि या समर्थन कर सकती है, या फिर किसी भी रूप में इस पर गौर कर सकती है अथवा नहीं।

श्री सभापतिः मेरे विचार से यह मामला इस सभा के सामने नहीं आता है। यह दूसरी सभा का मामला है, इस भाग के लिए यह मामला नहीं है, डॉ. अम्बेडकर।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः सभापति महोदय, मैं अपने उत्तर में कतिपय उन संशोधनों को लेना चाहता हूँ जिनकी सभा के सदस्यों ने तीखी आलोचना की है। निःसंदेह, मेरे लिए प्रत्येक संशोधन, जिसके बारे में सदस्यों ने अपने संयुक्ति के

1 द्रविड, पृष्ठ 575-582