अनुच्छेदों का संशोधन - Page 156

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लेकिन अपने उत्तर में मैं इस प्रश्न की ओर सदस्यों का ध्यान आकर्षित करूँगा। संविधान में इस अनुच्छेद को शामिल नहीं करने से क्या होगा? मेरे विचार से यह बिल्कुल स्पष्ट है कि संविधान में इस अनुच्छेद 373 को शामिल नहीं करने से यह होगा कि निरोधी निरुद्ध के अधीन निरुद्ध कए गए सभी व्यक्तियों को 26 जनवरी 1950 को रिहा करना पड़ेगा यदि उन लोगों ने तीन महीने की अवधि काट ली है, जैसा कि अनुच्छेद 22 अनुमति देता है और यदि संसद अनुच्छेद 22 के खंड (7) के अधीन तीन महीने कर पाती है। प्रश्न यह हैः क्या यह वांछनीय परिणाम है? क्या वर्तमान कानून के अधीन निरूद्ध किए गए सभी व्यक्तियों को 26 जनवरी 1950 को और अधिक लंबे समय तक निरुद्ध किए जाने वाले कानून बनाने की स्थिति में नहीं है मुझे लगता है कि वह बड़ा ही विनाशकारी परिणाम होगा। परिणामतः यह तथ्य के दृष्टिगत संसद के लिए तत्काल या 26 जनवरी से पहल समवेत होना तथा एक कानून पारित करना बिल्कुल असंभव है, जो उस तिथि से प्रभावी होगा, संविधान के अधीन कुछ प्राधिकार दे सकेगा जो संसद अनुच्छेद 22 के उपबंधों को पूरी तरह प्रभावी बनाना चाहेगी। संविधान के अधीन ऐसा कौन प्राधिकारी है? स्पष्टतः राष्ट्रपति ही एकमात्र प्राधिकारी है जो 26 जनवरी को या उससे पूर्व विद्यमान रहेगा और जो संसद के दायरे में कानून जल्दी से पारित करवा सकेगा और अधिक अवधि के लिए निरूद्ध किए जाने की अनुमति देने वाले अनुच्छेद 22 के उपबंधों को प्रभावी बना सकेगा। इसलिए निरोधी निरूद्ध संबंधी कानून को अलग-अलग रूप में बाँटना जरूरी है ताकि 373 जैसा अनुच्छेद हो सके। जो राष्ट्रपति को कानून अधिनियमित करने की शक्ति देता हो जो कि ससंद की शक्ति के अधीन होती है। महोदय, आगे मैं यह जोड़ना चाहता हूँ कि अनुच्छेद 373 में अंतर्विष्ट उपबंधों में कुछ भी नया नहीं है क्योंकि हमने अन्य अनुच्छेदों के माध्यम से राष्ट्रपति को विद्यमान कानूनों को अंगीकार करने की शक्ति प्रदान कर दी है ताकि उन्हें संविधान के उपबंधों के अनुरूप लाया जा सके। इस प्रकार का संशोधन संसद द्वारा ही किया जा सकता है, लेकिन हम यह भी महसूस करते है कि संसद के लिए जनवरी से तत्काल पहले भारतीय विधान मंडल द्वारा अधिनियमित इतने सारे कानूनों को अंगीकार करना संभव नहीं होगा ताकि उन्हें संविधान के अनुरूप लाया जा सके। इसलिए वह शक्ति राष्ट्रपति को दी गई है। उसी प्रकार से दूसरे अनुच्छेद के माध्यम से हमने राष्ट्रपति की कठिनाईयों को दूर करने के प्रयोजनार्थ इस संविधान में ही अस्थाई संशोधन करने की अनुमति दी है। इसलिए, मेरा यह कहना है कि इस अनुच्छेद में कुछ भी नया नहीं है, कुछ भी दुष्प्रभाव नहीं है। बल्कि निरोधी निरुद्ध संबंधी किसी भी कानून को अप्रभावी होने से बचाने के लिए यह अति आवश्यक अनुच्छेद है। महोदय, अब मै। अनुच्छेद पर आता हूद्द जो सैनिक कानून से संबंधित है। इस अनुच्छेद की भी काफी तीखी आलोचना की गई है। मुझे यह दुख के साथ कहना पड़ता है कि संविधान के अनुच्छेद खंड (1) और अनुच्छेद 21 मैं क्या कहा गया है। महोदय, मैं अनुच्छेद 20