अनुच्छेदों का संशोधन - Page 161

146 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कि स्थानीय तौर पर उपलब्ध नहीं हो सकता है। दूसरे एक उच्च न्यायालय में एक नए मुख्य न्यायधीश को लाया जाना वांछनीय हो सकता है, क्योंकि वह स्थानीय राजनीति और स्थानीय ईष्या द्वेष से अप्रभावित रहेगा। इसलिए हमने सोचा कि न्यायाधीशों के स्थानांतरण करने की शक्ति केंद्रीय सरकार के हाथ में होनी चाहिए।

हमने इस तथ्य का भी ध्यान रखा है कि एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों को स्थानांतरित करने की शक्ति का दुरुपयोग न हो। कोई प्रांतीय सरकार अपने यहाँ के उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का स्थानांतरण करना चाहती हो, क्योंकि वह न्यायाधीश कतिपय न्यायायिक मामलों में लिए गए अपने न्याययिक निर्णय विशेष के कारण उस सरकार के लिए असुविधाजनक हो चुका है या ऐसे निर्णय जो प्रांतीय सरकार पसंद नहीं करती हो, देकर स्वयं को कांटा बना डाला हो। हमें इस बात की सावधानी बरतनी है कि स्थानांतरणों को कार्यान्वित करने में इस प्रकार के विचारों की कोई भूमिक नहीं होनी चाहिए। स्थानांतरण केवल सामान्य प्रशासन की सुविधा के आधार पर होना चाहिए। परिणामतः हमने एक उपबंध किया है कि ऐसे स्थानांतरण भारत में ममुख्य न्यायाधीश के परामर्श से किए जाने चाहिए, जिसके बारे में यह विश्वास किया जा सकता है कि वह स्थानीय या वैयक्तिक पूर्वाग्रहों से अप्रभावित हुए बिना सरकार को सलाह देगा।

इसलिए एकमात्र प्रश्न यह रह गया था कि क्या ऐसे स्थानांतरण को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए और इसमें न्यायाधीश को होने वाले नुकसान की क्षतिपूर्ति करने का कोई प्रावधान नहीं होना चाहिए। हमने यह महसूस किया कि यह बड़ा ही कठोर व्यवहार होगा। आमतौर पर किसी उच्च न्यायालय में किसी न्यायाधीश की नियुक्ति स्थानीय बार से की जाती है। नियुक्त किए गए न्यायाधीश का वहाँ घर हो सकता है। वहाँ उसका अपना घर और दूसरी चीजें हो सकती हैं जिनमें उसकी व्यक्तिगत रुचि हो सकती है। यदि उसका स्थानांतरण एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में होता है तो स्पष्ट है कि वह अपने घर का सारा सामान लेकर वहाँ नहीं जा सकता है। उसने अपने मूल प्रांत जहाँ वह कार्यरत है अपना घर बना रखा होगा और नए प्रांत जहाँ उसका स्थानांतरण हुआ है में उसे अपना एक नया घर स्थापित करना पड़ेगा। प्रारुप समिति ने यह उपबंध करना न्यायोचित समझा कि इस तरह के स्थानांतरण के मामले में संसद को स्थानांतरित किए गए न्यायाधीश को वैयक्तिक भत्ता देने की अनुमति होनी चाहिए। मेरा यह कहना है कि प्रारुप समिति द्वारा प्रस्तावित संशोधन में कुछ भी गलत नहीं है।

अनुच्छेद 148 के बारे में मुझे इस चरण में कुछ भी कहने की जरूरत नहीं है। क्योंकि मेरे मित्र श्री टी.टी. कृष्णमाचारी द्वारा संशोधन (संख्या 618) पर उन सभी ने अपी सहमति दे दी है, जिन्होंने इस अनुच्छेद विशेष में रुचि दिखाई थी।

उसी प्रकार से अनुच्छेद 320 जिस पर इतना अधिक विवाद हुआ। (यदि मैं