अनुच्छेदों का संशोधन - Page 162

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कहूँ कि बिना किसी गलती के उस पर विवाद हुआ, बेवजह विवाद हुआ), संशोधन संख्या 558 के आ जाने से सारा विवाद समाप्त हो चुका है, क्योंकि इसके माध्यम से सभी आपत्तिजनक भागों जिन्हें सदस्यगणों ने एक स्तर पर पसंद नहीं किया था जिसको हटा दिया गया है।

अनुच्छेद 365 के संबंध में काफी बहस और चर्चा हो चुकी है। मैंने भी उसी बहस में हिस्सा लिया था और अपने दृष्टिकोण रखे थे मुझे विश्वास है कि मेरे द्वारा कही गई सभी बातों पर विचार करके सदस्यों को यह लगेगा कि अनुच्छेद 365 एक आवश्यक अनुच्देद है और पूर्वावस्था में सभा द्वारा लिए गए किसी निर्णय को किसी भी अर्थ में प्रभावित नहीं करता है।

मैं अनुच्छेद 378 पर आता हूँ यह बताया गया कि इस अनुच्छेद में चुनाव के प्रयोजनार्थ जनसंख्या निर्धारण करने हेतु एक समाज स्वरूप का उपबंध किया जाना चाहिए। मुझे खेद के साथ यह कहना पड़ता है कि मैं इस एक समान नियम के इस प्रस्ताव को स्वीकार कर पाने की स्थिति में नहीं हूँ। विभिन्न प्रांतों की बदलती परिस्थितियों में एक समान नियम रखना बिल्कुल असंभव है। इसलिए जनसंख्या का निर्धारण करने के प्रयोजनार्थ विभिन्न प्रांतों के मामले विभिन्न मानक लागू करने की स्वतंत्रता केंद्र के पास रहनी चाहिए। विभिन्न राज्यों के लिए विभिन्न नियम लागू करने के मामले में यदि कोई गंभीर चूक होती है तो यह मामला भावी संसद के निर्धारण के लिए खुला होगा क्योंकि निर्वाचन क्षेत्रों के लिए तर्कसंगत सभी मामलों को संसद के समक्ष रखा जाएगा और संसद इस बात को सुनिश्चित करने की स्थिति में होगी कि क्या केंद्रीय सरकार द्वारा सुनिश्चित की गई जनसंख्या समुचित है या उम्मीद से नीचे है अथवा ऊपर है। महोदय, मैं अब अनुच्देद 391 पर आता हूँ।

पंडित बालकृष्ण शर्माः अनुच्देद 379?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः अनुच्छेद 379 के बारे में अपने माननीय श्री शर्मा की आपत्ति को मैं भली-भाँति समझ सकता हूँ। उन्हें मुख्य तौर पर भारत डोमिनियन शब्दों पर आपित्त है। कल मैंने मुख्य प्रारुपकार श्री मुखर्जी की सहायता से भारत डोमिनियन शब्दों को हटाने के उद्देश्य से अनुच्छेद का प्रारुप फिर से तैयार करने की कोशिश की थी। लेकिन मैं स्वीकार करता हूँ कि मैं उसमें विफल रहा। मैं इसलिए श्री शर्मा से अनुरोध करता हूँ कि वह इस अनुच्छेद को इसी रूप में रखने की अनुमति दें। यह दुर्भाग्यपूर्ण है, किंतु हमारे पास बचे समय के अंदर इसका कोई उपचार नहीं है।

अनुच्छेद 391 पर आएँ तो स्थिति यह है संविधान में नए प्रांतों के निर्माण के लिए उपबंधों के दो सेट हैं संविधान लागू होने के बाद प्रांत निर्मित किए जा सकते हैं। 26 नवंबर और 26 जनवरी के बीच प्रांत निर्मित किए जा सकते हैं। संविधान लागू