148 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
हो जाने के बाद प्रांतों के निर्माण के संबंध में अनुच्छेद 3 और 4 प्रचलन में आएँगे। वे अनुच्छेद संसद को वर्तमान प्रांतों की सीमाओं में परिवर्तन करके नए प्रांतों का निर्माण करने की अनुमति देते हैं वे अनुच्छेद इतने स्पष्ट हैं कि मेरे विचार से मेरे द्वारा और कोई टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है।
अभी से लेकर 26 जनवरी के बीच नए प्रांतों के निर्माण के संबंध में भारत सरकार अधिनियम 1935 की धारा 390 और वर्तमान संविधान का अनुच्छेद 391 प्रचलन में आएँगे। महोदय अनुच्छेद 391 कहता है कि यदि अभी से लेकर 26 जनवरी के बीच भारत सरकार अधिनियम 1935 के अधीन 391 के अधीन उस आदेश को प्रभावी भारत सरकार अधिनियम की धारा 290 के अधीन प्रभावी बनाने की शक्ति प्राप्त होगी। इस तथ्य के बावजूद भी यह एक महत्वपूर्ण बात है, कि 26 जनवरी को भारत सरकार, अधिनियम 1935 निरस्त हो जाएगी, पर उसके अधीन की गई कार्यवाही चलती रहेगी। राष्ट्रपति अनुच्छेद 391 के अधीन भारत सरकार अधिनियम 1935 के अधीन की गई कार्यवाही को आगे बढ़ाने तथा पहली अनुसूची और तत्परिणामी तौर पर चौथी अनुसूची जो राज्यों की परिषद् के प्रतिनिधित्व से संबंधित का संशोधन करने वाले आदेश के द्वारा उसे प्रभावी बनाने की शक्ति प्राप्त है।
एक माननीय सदस्यः वह 26 जनवरी के बाद ही कार्रवाई कर सकते हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः वह किसी भी समय कार्रवाई कर सकता है_ संविधान सभा इस बात पर गौर नहीं कर पाई, क्योंकि 26 जनवरी के पश्चात् इस प्रयोजनार्थ यह विद्यमान नहीं रहेगा। मुद्दा यह है कि भारत सरकार अधिनियम, 1935, 25 नवंबर के बाद प्रचलन में जारी रहेगा। जब तक अधिनियम जारी रहता है, इसके अधीन कार्रवाई करने का गवर्नर जनरल का अधिकार भी जारी रहेगा। वह जब चाहे, किसी समय कार्रवाई कर सकता है।
मेरे मित्र श्री सिधवा ने एक प्रश्न उठाया यानि कि अभी और 25 जनवरी के दिन की गई कार्रवाई को संसद की जाँच के विचाराधीन रखा जाना चाहिए। मेरे विचार से उनकी मंशा यह है कि इसे कार्यपालिका की दया पर ही नहीं छोड़ दिया जाना चाहिए। मेरे मित्र श्री सिंघवा को यह याद होगा कि हमारा संविधान 26 जनवरी को लागू होगा, 25 जनवरी तक जो संविधान भारत में लागू रहेगा, वह भारत सरकार अधिनियम, 1935 के माध्यम से सुनिश्चित किया गया संविधान है, जिसे 15 अगस्त, 1947 को अंगीकार किया गया था। इसलिए अभी और 25 जनवरी के बीच जो संविधान लागू होगा, वह हमारे द्वारा पारित किया जाने वाला संविधान न होकर भारत सरकार अधिनियम 1935 के माध्यम से सुनिश्चित किया गया संविधान होगा। इसलिए उनके प्रश्न की क्या इस मामले से संसद या भारतीय विधानमंडल को परामर्श देने का अधिकार होना चाहिए