खंड आठ प्रारुप विधान का तीसरा पठन - Page 170

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... महोदय, मैं अब प्रारुप समिति, जिसकी सेवाएँ हमारे लिए काफी बहुमूल्य हैं, द्वारा की गई महान सेवाओं की सराहना करता हूँ, महत्वपूर्ण अनुच्छेदों पर निर्णय लेने में उन लोगों ने दिन-रात एक कर दिए। मुझे प्रारुप समिति के अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की तेजस्विता और क्षमता की प्रशंसा में कुछेक शब्द बोलने चाहिए।

(जोर की हँसी) मैं उस समुदाय से आता हूँ जिसने डॉ. अम्बेडकर जैसी विभूति को पैदा किया है, मुझे गर्व की अनुभूति हो रही है।

कि उनकी इस क्षमता की पहचान केवल हरिजनों ने ही नहीं, बल्कि भारत में रहने वाले सभी समुदायों ने की है। अनुसूचित जातियों ने महान नंदनार, महान भक्त, तिरूपजानालवर, महान वैष्णव संत और सबसे बड़ा तिरूवल्लूवर, महान दार्शनिक पैदा किए हैं जिनकी प्रसिद्धि न सिर्फ भारत बल्कि पूरे विश्व में फैली है।

हरिजन के महान व्यक्तियों की आकाशगंगा में अब एक और नाम डॉ. अम्बेडकर का जुड़ गया है जिन्होंने एक व्यक्ति के रूप में विश्व को दिखा दिया है कि अनुसूचित जाति किसी से कम महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि वे ऊँचाइयों तक पहुँच सकते हैं और विश्व को अपनी महान सेवा दे सकते हैं। महोदय, मैं जानता हूँ कि उन्होंने संविधान तैयार करने में अपनी महान सेवा और त्याग करके हरिजन समुदायों के साथ ही भारत की सेवा की है और यह संविधान 26 जनवरी, 1950 से नई व्यवस्था लागू करेगा और महोदय मैं यह मानता हूँ कि संविधान तैयार करने में मुख्य ड्राफटसमेन और उसके कर्मचारियों ने जो मेहनत की है, उसका भी कम महत्व नहीं है_ वे भी उतने ही हमारी प्रशंसा के पात्र हैं...

सेठ गोविंद दास (सी.पी. और बरारः जनरल)ः सभापति महोदय,

मुझे आज बड़ी खुशी है कि संविधान जिसे पूरा करने में हमें लगभग तीन वर्ष लगे हैं, का तीसरा पठन अब शुरू हो चुका है। इस अवसर पर, सबसे पहले मैं डॉ. अम्बेडकर जिन्होंने इस संविधान को समुचित रूप में रखने के लिए काफी मेहनत की है, को बधाई देना चाहता हूँ। आज उन्होंने यह प्रस्ताव किया है कि सभा द्वारा तैयार किए गए संविधान को पारित किया जाए। डॉ. अम्बेडकर के बारे में कहा गया है कि वह वर्तमान युग के मनु हैं। इस वक्तव्य में जितनी भी सच्चाई हो मैं यह कह सकता हूँ कि उन्होंने संविधान बनाने का जो काम सौंचा गया था, उसे उन्होंने पूरा कर दिखाया है...

श्री रोहिणी कुमार चौधरी (असमः जनरल)ः डॉ. अम्बेडकर को मनु के रूप में वर्णन करते समय क्या माननीय सदस्य हिंदू संहिता का उल्लेख कर रहे थे, मैं सूचना को औचित्य का प्रश्न उठाता हूँ?

12 सी.ए.डी. आधिकारिक प्रतिवेदन, खंड द्रविड वही पृष्ठ 611 X 17 नवंबर 1949, पृष्ठ 610