3
याचिका स्वीकार करने का क्षेत्राधिकार नहीं रह जाएगा। लेकिन, जो अधिक महत्वपूर्ण बात है, वह यह है कि प्रिवी काउंसिल को 26 जनवरी, 1950 की स्थिति के अनुसार उसके समक्ष लंबित पड़ी अपीलों और याचिकाओं को निपटाने का भी क्षेत्राधिकार नहीं होगा। अब 26 जनवरी, 1950 को जो स्थिति होगी वह इस प्रकार की होगी। वर्तमान में प्रिवी काउंसिल के समक्ष 70 सिविल अपील और 10 आपराघिक अपील लंबित हैं। प्रिवी काउंसिल की अगली बैठक के लिए मुकदमों का जो कैलेंडर तैयार किया गया है, उसमें 20 अपीलों की सुनवाई और निपटान किया जाना निर्धारित है। यह भी एक तथ्य है कि संविधान के लागू होने की तिथि से पूर्व संभवतः भारतीय अपीलों को निपटाने के उद्देश्य से प्रिवी काउंसिल की यही एकमात्र बैठक होगी।
हमारे पास जो सूचना उपलब्ध है उसके अनुसार, प्रिवी काउंसिल के अगले सत्र में सुनवाई के लिए तैयार की गई मुकदमों की सूची में लगभग 20 अपीलें अंतर्विष्ट हैं, जिसका अर्थ यह है कि 26 जनवरी, 1950 को 60 अपीलें लंबित रह जाएँगी जिनका निपटान नहीं हो सकेगा और हमारे सामने जो वास्तविक प्रश्न विचार के लिए है, वह यह है कि 26 जनवरी, 1950 को प्रिवी काउंसिल के समक्ष संभावित रूप से लंबित रहने वाली इन 60 अपीलों के संबंध में क्या किया जाना चाहिए?
* सी.ए.डी. खंड 9, 17 सितंबर, 1949, पृष्ठ 1589-1590