खंड आठ प्रारुप विधान का तीसरा पठन - Page 171

156 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सेठ गोविंद दासः [@ नहीं महोदय, उस वक्तव्य का हिंदू संहिता से कुछ भी लेना देना नहीं है। मैं समझता हूँ कि सभा को इस बात की जानकारी है कि मैं हिंदू संहिता के बहुत सारे प्रावधानों का विरोधी हूँ ]

1 श्री लक्ष्मी नारायण साहूः यद्यपि मैं डॉ. अम्बेडकर का इस संबध में किए गए कठिन परिश्रम के लिए अभिवादन करता हूँ और उन्हें बधाई देता हूँ फिर भी मैं उनकी मेहनत के फलस्वरूप प्राप्त हुए अप्राकृतिक उत्पाद के लिए अभिवाद नहीं कर सकता हूँ। पूरी तरह से जानता हूँ कि लगातार परिवर्तन करते रहने के कारण बढ़व तथा हास्यास्पद बन गया है। मैं पूरी तरह से जानता हूँ कि वह अपने उत्तर में कहेंगे कि यह उनका ही कार्य नहीं है। उन्होंने देश के बहुमत दल की इच्छाओं के अनुरूप संविधान तैयार किया है ...

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श्री आर के सिधवाः अब संविधान पर आता हूँ इस सभा में 6 दिसंबर, 1946 का प्रवेश करने से पूर्व इस यादगार हॉल को, यह संविधान तैयार करने के लिए विशेष तौर पर सजाया संवारा गया था, जिसे भारत के इतिहारस में याद रखा जाएगा... अनुभव से ही देख चुके हैं कि आज पूरे तीन वर्ष हो गए हैं, बल्कि विशुद्ध रूप से देखें जो जब इस संविधान को तैयार करने में तीन वर्ष से 15 दिन कम लगे हैं। 1 जनवरी, 1948 को 9 दिसंबर, 1946 से 1947 के बीच चर्चा करने के बाद एक प्रारुप संविधान हमें सौंपा गया था। इसमें संविधान के 313 अनुच्छेद थे। आज जो हमने इस सभा में संविधान प्रस्तुत किया है, उसमें 395 अनुच्छेद हैं, अर्थात 82 नए अनुच्छेद अंतःस्थापित किए गए हैं। फिर उसमें लगभग 220 पुराने अनुच्छेद थे, जिन्हें समाप्त कर दिया गया और लगभग 120 अनुच्छेदों के मामले में शब्दों में परिवर्तन किए गए बगैर प्रस्तावना स्वीकार की गई जबकि कई अनुच्छेदों में परिवर्तन किया गया और मुझे खुशी है कि सभा भी खुश है कि हमने अनुभव के आधार पर यह निर्णय लिया कि हमें संविधान तैयार करने में जल्दबाजी दिखाना वांछनीय नहीं होगा। इसलिए हमने इस संविधान, जिस पर हम गर्व करेंगे, को पूरा करने में लंबा समय लिया है, वह सही है। इस सभा के बाहर इस बात की आलोचना की जाती रही है कि हमने काफी लंबा समय लिया है तथा पैसे की बर्बादी की है। मैं उन आलोचनाओं को महत्व नहीं देता।

यह भी कहा गया कि हममें से कुछ लोग महज संशोधन भेजने कि खातिर

1 2 @ सी.ए.डी. आधिकारिक प्रतिवेदन, खंड द्रविड वही, पृष्ठ 623 हिंदुस्तानी भाषण का अनुवाद। XI 17 नवंबर 1949, पृष्ठ 613