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ही संशोधन भेज रहे थे तथा भाषण दे रहे थे। उन लोगों के तर्क या बातें नहीं सुनी है। हम लोग इस कांस्टीट्यूशन हॉल में अपने विचारों को लेकर युद्धरत थे और हमने बहुत लंबा संघर्ष किया है और मुझे खुशी है कि प्रारुप समिति ने हमारे इस युद्ध को सही भावना से स्वीकार किया है। हमने अपना कर्तव्य पूरा किया है। इस मामले की कार्यवाही का अभिलेख भावी पीढि़यों को देखने और इतिहासकारों को तय करने के लिए मौजूद है कि हमने समय की बर्बादी की है अथवा इस देश के लोगों के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन किया है और सबको गर्व है तथा मुझे भी गर्व है।
इतिहास इस संविधान को परखेगा। यह निश्चय ही अपने आप में परिपूर्ण नहीं है, इसमें दोष हो सकते हैं, मैं जानता हूँ कि इसमें दोष मौजूद है मैंने आपको बताया था कि मैंने अपने संशोधन प्रस्तुत करके इस हाल में सघर्ष किया है और उस संघर्ष में हार गया। लेकिन लोगों को यह बताना मेरा कर्तव्य है कि यह सर्वोत्तम संविधान है और मुझे उम्मीद है कि संविधान सभा का प्रत्येक सदस्य मतभेद होने के बावजूद यह कहेगा कि हमें इस संविधान पर गौरव है और हमें विश्व की सभा में यह घोषणा करनी चाहिए और विश्व को यह महसूस कराना चाहिए कि यह एक मूल्यवान दस्तावेज है जिसका संदर्भ विश्व के विभिन्न देश लेंगे। इसलिए मुझे इस संविधान पर गर्व महसूस होता है। जो 26 जनवरी, 1950 को कानून बन जाएगा और वह ऐतिहासिक दिन होगा जब हम लोकतांत्रिक संप्रभु का उद्घाटन करेंगे।
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1 सी.ए.डी. आधिकारिक प्रतिवेदन, खंड X 17 नवंबर 1949, पृष्ठ 625-626