खंड आठ प्रारुप विधान का तीसरा पठन - Page 175

160 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

1 माननीय श्री एन.वी. गाडगिलः महोदय, संविधान एक साधन है, स्वयं में साध्य नहीं है। अच्छे कामगार के हाथ में कार्य करने के लिए यह एक अच्छा औजार है। दृढ़ निश्चयी कामगार के हाथों में यह औजार रहने से वह उस चीज को प्राप्त कर लेगा जो वह चाहता है। काम करने के अनिच्छुक कामगार के हाथ में यह औजार दे भी दिया जाए तो भी वह काफी शिकायत करता रहेगा। मेरी विनम्र राय यह है कि यह संविधान अपने दोषों के बावजूद (इसमें दोष व्याप्त है और मैं इसकी अंध प्रशंसा नहीं कर रहा हूँ। यद्यपि विश्वमित्र की तरह इसे खारिज भी नहीं कर रहा हूँ जैसा कि दूसरों ने किया है।) उन सामाजिक और आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम है जिसकी चर्चा प्रस्तावना में की गई है। दूरदर्शी राष्ट्रपति ऊर्जावान और स्वप्नदर्शी प्रधानमंत्री बुद्धिमान सांसदों और जिम्मेदार विपक्ष की सहायता से मैं नहीं समझता हूँ कि इस संविधान के अधीन हमें कोई उन लक्ष्यों को प्राप्त करने से रोक पाएगा जिसके लिए हममें से प्रत्येक व्यक्ति प्रतिबद्ध है।

2 श्री एम अनंत सयनम अयंगर (मद्रासः जनरल)ः इस संविधान को तैयार करने में सभी समुदायों - हिंदुओं, मुस्लिमों, सिक्खों, पारसियों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया है। सभी राजनीतिक विचारधाराओं के नेता का यहाँ प्रतिनिधित्व हुआ है। सभी विचारधाराओं के नेता यहाँ मौजूद रहे हैं। यहाँ तक कि डॉ. अम्बेडकर, जो इसे महज देखने यहाँ आए थे, ने इस संविधान को तैयार करने में प्रमुख भूमिका निभाई है और हम जो संविधान पारित करने जा रहे हैं, वह उनके निर्माताओं में से एक हैं। वह व्यक्ति जो इस बारे में शंका व्यक्त करने और आलोचना करने आया था, ने अंतः इस संविधान का प्रभार संभाला और इसे तैयार किया। मैं उन्हें बधाई देता हूँ और स्वयं को बधाई देता हूँ कि हम सबने उनके प्रति सदस्यता दिखाई और उन्होंने भी उसी रूप में प्रत्युत्तर दिया। आखिरकार, एक-दूसरे के निकट संपर्क में आकर ही हम एक-दूसरे के विचार को समझ सकते हैं। अब तक हम एक-दूसरे से दूर रहे हैं, हमारे दृष्टिकोण काफी संकुचित थे, जिसे हमने व्यापक बनाया है। जिस भावना के साथ यह संविधान तैयार किया गया है उसी के अनुरूप यदि इसे लागू किया जाए, जो मुझे पूरा विश्वास है कि हम विश्व के अग्रिम राष्ट्रों की पंक्ति में खड़े होंगे।

हमारे बीच श्री अल्लादि कृष्णमाचारी अय्यर जैसे बहुत सारे प्रख्यात न्यायविद भी हैं, जिन्हें हम आसानी से नहीं भूल सकते हैं। अपने कमजोर और खराब स्वास्थ्य के बावजूद वह सभा के भीतर और बाहर समितियों में परिहित के लिए अपनी सेवा देते रहे हैं। हमारे बीच हमारे मित्र श्री गोपालस्वामी आयंगर जैसे प्रशासनिक भी हैं उन्हें सिविल

12 सी.ए.डी. आधिकारिक प्रतिवेदन, खंड द्रविड, पृष्ठ 663-665 X 1 17 नवंबर 1949, पृष्ठ 653