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तीन वर्षों के रिकार्ड समय में पूरा किया गया है - पस्तुतः मेरा इन तीन वर्षों से परेशानी, विवाद और कलहपूर्ण वातावरण रहा है। यह एक महान उपलब्धि है। महोदय, कागज पर एक अच्छे संविधान का होना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि लोगों की सदस्यता, ईमानदारी तथा इसके उपयोगा करने की उत्कंठा भी महत्वपूर्ण है। यदि संविधान का उपयोग उस भावना से किया जाए तो मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे देश का भविष्य उज्जवल रहेगा। हमें अपने देश का उज्जवल भविष्य नजर आ रहा है और हम कामना करते हैं। कि वह विश्व के अग्रिम देशों की कतार में खड़ा हो। यदि हम उसी भावना के साथ संविधान का उपयोग करते हैं, जिस भावना के साथ हमने इसे बनाया है, तो मुझे पूरा विश्वास है कि इससे देश का भविष्य उज्जवल रहेगा। इन्हीं शब्दों के साथ प्रस्ताव का समर्थन करता हूँ।
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1 पंडित ठाकुर दास भार्गव (पूर्वी पंजाबः जनरल)ः ...महोदय इस अवसर पर मैं अपने अन्य मित्रों का धन्यवाद करना चाहूँगा जिन्होंने इस संविधान का प्रारुप तैयार करने में हमारी मदद की है। मैं विशेषकर डॉ. एच. सी. मुखर्जी के नाम का उल्लेख करना चाहूँगा जिन्होंने महान योग्यता और सूझ-बूझ के साथ इस सभा की अध्यक्षता की थी जब महोदय आप बीमा चल रहे थे और मैं उनका धन्यवाद करता हूँ। महोदय, मैं नहीं जानता किन शब्दों में मैं प्रारुप समिति का धन्यवाद करूँगा, प्रारुप समिति के अध्यक्ष में जिस प्रकार से कानूनी निपुणता, अथक परिश्रम, पूर्ण दक्षता और दृढता के साथ-साथ विनम्रता से इस सभा के माध्यम से इस संविधान को प्रस्तुत किया है और इस संदर्भ में सभी जटिल प्रश्नों का समाधान किया है, उसके लिए हमारी कृतज्ञता व्यक्त करने हेतु शब्द विफल हैं। उन्होंने जो महान लोकभावना का परिचय दिया है, मैं डॉ. अम्बेडकर से अपील करूँगा, मुझे खेद है कि वह आज सभा में मौजूद नहीं हैं, उन्होंने स्वयं को अब तक केवल अनुसूचित जातियों का नेता ही माना है, कांग्रेस में शामिल हो जाएँ। उन्होंने हमारे दिल में काफी ऊँचा स्थान बना लिया है और मुझे आशा है कि वह कांग्रेस के हाई कमान की आज उन्होंने संकीर्ण स्थिति हासिल की हुई है....
1 सी.ए.डी. अधिकारिक प्रतिवेदन, खंड X 1 18 नवंबर 1949, पृष्ठ 682