प्रिवी काउंसिल क्षेत्राधिकार विधेयक को समाप्त किया जाना - Page 19

4 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

निःसंदेह इस मामले को निपटाने के दो तरीके हैं। एक तरीका तो प्रिवी काउंसिल के क्षेत्राधिकार को जारी रखा जाना और उसके समक्ष लंबित पड़ी सभी अपीलों को निपटाया जाना है। इस प्रक्रिया को आयरलैंड के संविधान में अनुच्छेद 37 के माध्यम से अपनाया गया था, जिसमें यह कहा गया है कि उनके संविधान में किए गए कोई भी उपबंध संविधान के लागू होने की तिथि से पूर्व प्रिवी काउंसिल के समक्ष लंबित पड़े मामलों को निपटाने के उसके क्षेत्राधिकार को प्रभावित नहीं करेंगे। लेकिन, जैसा कि मैं प्रस्तावित अनुच्छेद 308,

खंड (3) में बता चुका हूँ कि हमने प्रिवि काउंसिल के क्षेत्राधिकार को बनाए रखने का कोई प्रस्ताव नहीं किया है। हम 26 जनवरी, 1950 को प्रिवी काउंसिल के क्षेत्राधिकार को समाप्त करने का प्रस्ताव करते हैं। इसलिए एकमात्र 2 फेडरल न्यायालय में विहित कर दिया जाएगा और वे 10 मुकदमों जिनके बारे में, मैं फेडरल न्यायालय के क्षेत्राधिकार के संबंध में पहले ही उल्लेख कर चुका हूँ, को छोड़कर 10 अक्तूबर को उनके समक्ष पड़े सभी मुकदमे स्थानांतरित कर दिए जाएँगे। इस विधयेक में यही किया गया है।

अब, महोदय, विधेयक के विशिष्ट उपबंधों पर आते हुए यह देखना होगा कि खंड 2 भारत के संपूर्ण क्षेत्र में न्यायालयों पर प्रिवी काउंसिल के क्षेत्राधिकार को समाप्त करें। खंड 3 फेडरल न्यायालय पर प्रिवी काउंसिल के क्षेत्राधिकार को समाप्त करता है और खंड 5, खंड 2 और 3 के विपरीत है क्योंकि इसमें प्रिवी काउंसिल को फेडरल न्यायालय पर क्षेत्राधिकार प्रदान किए जाने का प्रस्ताव किया गया है। खंड 4 प्रिवी काउंसिल के समक्ष लंबित पड़े मामलों से संबंधित है। यद्यपि खंड 5 फेडरल न्यायालय पर प्रिवी काउंसिल के क्षेत्राधिकार प्रदान करता है फिर भी खंड 4 एक अपवाद खंड है और उसमें प्रिवी काउंसिल के क्षेत्राधिकार के समक्ष लंबित पड़ी कतिपय अपीलों और याचिकाओं के मामले में उसे क्षेत्राधिकार अपवाद स्वरूप प्रदान किया गया है। उन्हें चार मदों के अधीन वर्गीकृत किया जा सकता हैः (1) ऐसी अपीलें और याचिकाएँ जिनमें निर्णय तो दे दिया गया है लेकिन, 10 अक्तूबर से पहले काउंसिल में आदेश पारित नहीं किया गया है, (2) त्रैमासिक कर वसूली (माइकलमैस) जिसकी बैठक 12 अक्तूबर को शुरू होती है, की सूची में प्रविष्ट अपीलें, (3) दर्ज कराई जा चुकी याचिकाएँ और 10 अक्तूबर से पूर्व दर्ज कराए जाने वाली याचिकाएँ और (4) वे अपीलें तथा याचिकाएँ जिन पर प्रिवी काउंसिल द्वारा निर्णय सुरक्षित रखा जा चुका है, यद्दयपि सुनवाई हो चुकी है। खंड 6 में से सभी मामले जो खंड 4 के अंतर्गत नहीं आते फेडरल न्यायालय में स्वतः ही स्थानान्तरित हो जाएँगे। यद्दयपि वे मामले प्रिवी काउंसिल में लंबित पड़े हो सकते हैं। खंड 7 और 8 केवल संरचना संबंधी मामले हैं।

प्रिवी काउंसिल के क्षेत्राधिकार में कटौती करते समय यह महसूस किया गया कि भारत सरकार अधिनियम, 1935 की कतिपय धाराओं को निरस्त करना और