खंड आठ प्रारुप विधान का तीसरा पठन - Page 180

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1 सेठ दामोदर स्वरूप (संयुक्त प्रांतः जनरल)ः सभापति महोदय प्रारुप

संविधान का द्वितीय पठन समाप्त हो चुका है और तीसरे पठन पर चर्चा हो रही है जो कि तीन या चार दिनों में समाप्त हो जाएगा। उसके बाद 26 जनवरी का ऐतिहासिक दिन होगा जब इस संविधान का उद्घाटन किया जाएगा। यह सब अच्छ बात है और इसके लिए माननीय डॉ. अम्बेडकर और प्रारुप समिति के उनके अन्य सहयोगी संपूर्ण सभा की ओर से बधाई के पात्र हैं क्योंकि उन लोगों ने बड़ी निपुणता और परिश्रम के साथ इस संविधान का प्रारुप तैयार किया है....

3 श्री टी. प्रकाशम (मद्रासः जनरल)ः संविधान एक महान दस्तावेज है और मेरे मित्र जो इसे तैयार करने में प्रभावी रहे हैं- डॉ. अम्बेडकर - एक महान वकील और बड़े ही सुयोग्य व्यक्ति हैं। उन्होंने यहाँ अपने किए कार्य से यह दर्शाया है कि वह ग्रेट ब्रिटेन के किंग काउंसिल बनाने के लिए कितने सक्षम हैं, संभवतः वह वूलसैक में ही बैठने के लिए पात्र हैं, लेकिन इस देश के लोग जैसा संविधान चाहते थे, वैसा संविधान वह नहीं है। माहत्मा गाँधी ने कांग्रेस के नाम पर इस देश को संगठित करने का कार्य जब शुरू किया तो उन्होंने शीघ्र ही इस बात की पहचान कर ली कि इस देश की किस प्रकार सहायता की जा सकती है और लाखों लोगों को मदद पहुँचाई जा सकती है, इसलिए उन्होंने यह निर्णय लिया कि पूरे देश को भाषा के आधार पर विभाजित किया जाए कि प्रत्येक क्षेत्र स्वयं का विकास कर पालने में सक्षम हो सके....

4 प्रो. शिब्बनलाल सक्सेनाः ...... संविधान की मेरे द्वारा की गई आलोचना का यह अर्थ नहीं है कि मैं इन तीन वर्षों के दौरान हमने जो उपलब्धि हासिल की है उसके प्रति आँखे मूँद ली हैं। मेरा मानना है कि विगत तीन वर्षों के दौरान संविधान तैयार करना ही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि रही है। आजादी की सुबह में ब्रिटिश सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों की समस्या को कृत्रिम रूप से सृजित करके खड़ी की गई बाधाएँ भारतीय रियासतों के राजाओं की समस्या और सिविल सेवा की स्थाई समस्या गत दो वर्षों की अल्पावधि में ही जादू की छड़ी की तरह समाप्त की जा चुकी है। संविधान तैयार करने में हुई देरी के कारण हम इस संविधान में 566 भारतीय रियासतों जिन्हें अब नौ प्रांतों में परिवर्तित तथा विलय करके संघ की अन्य इकाइयों के समकक्ष रख दिया गया है के प्रशासन के लिए समान प्रकार का उपबंध करने में सक्षम हो पाए हैं। इस एकमात्र उपलब्धि को ही किसी देश का महानतम कार्य माना जाएगा

* * * * * 1 3 4 सी.ए.डी. अधिकारिक प्रतिवेदन, खंड वही, पृष्ठ 697वही, पृष्ठ 707 X 19 नवंबर 1949, पृष्ठ 661