खंड आठ प्रारुप विधान का तीसरा पठन - Page 181

166 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

1 माननीय रेवर्ड जे. जे. एम. निकोलस राय (असमः जनरल)ः सभापति महोदय, मुझे डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तुत इस प्रस्ताव कि सभा द्वारा तैया किए गए संविधान को पारित किया जाए का हृदय से समर्थन करने हेतु यहाँ आकर बहुत खुशी हुई है। मैं यह मानता हूँ कि भारत और विश्व की वर्तमान परिस्थितियों में यही सर्वोतम संविधान तैयार किया जा सकता था। यद्यपि इसमें निसंदेह त्रुटियाँ मौजूद हैं, हम कुछ उपबंधों को दूसरे रूप में रखना चाहते थे, फिर भी महोदय मेरा मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में यही सर्वोतम चीज हम तैयार कर सकते थे। महोदय, मझे खुशी है कि इस संविधान को तैयार करने में मेरी हिस्सेदारी चाहे वह बहुत ही कम क्यों न हो रही है। पूरे देश ने आलोचना करके अथवा सुझाव देखकर इस संविधान को तैयार करने में हिस्सा लिया है। प्रारुप संविधान का दो वर्षों के अंदर देश के समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है और हममें से प्रत्येक व्यक्ति को इसकी आलोचना करने या सुझाव देने का मौका मिला है और यहाँ हममें से प्रत्येक व्यक्ति को इस संविधान को तैयार करने में भाग लेने का मौका मिला है। इसलिए हम कह सकते हैं कि यह संविधान पूरे देश के लिए और पूरे देश के द्वारा.....

....महोदय अब मैं दूसरी बात छठी अनुसूची के बारे में बोलना चाहता हूँ। मैं श्री एस.एन. मुखर्जी, ड्राफटसमैन, सर बी.एन. राव और डॉ. अम्बेडकर का इस छठी अनुसूची का प्रारुप तैयार करने पर विशेष ध्यान देने के लिए आभारी हूँ। मैं प्रारुप समिति पर विशेष ध्यान देने के लिए आभारी हूँ। मै प्रारुप समिति के सदस्यों, जिन्होंने हमें उनके समक्ष बोलने का मौका दिया, के प्रति भी आभारी हूँ....

2 डॉ. रघुवीरा (सी. पी. और बरारः जनरल)ः @ [ इस संविधान में केवल विदेशी आदर्शों को शामिल कर लिया गया है। इसमें कुछ भी भारतीयता नहीं है। तथापि, मैं आशा करता हूँ कि कुछ वर्षों के बाद इस संविधान का स्वरूप यही रह जाएगा जिस रूप में यह पारित किया गया है और इसका चरित्र विशुद्ध भारतीय हो जाएगा तथा यह इस देश के लोगों की मूलभूत और मौलिक जरूरतों को पूरा कर पाएगा।

1 2 सी.ए.डी. आधिकारिक प्रतिवेदन, खंड वही, पृष्ठ 715 X 19 नवंबर 1949, पृष्ठ 708

@ हिंदुस्तानी भाषा में दिए गए भाषण का अनुवाद।