170 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
संविधान है। कई माननीय सदस्यों ने कहा है कि यह एक अस्थाई संविधान है।
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मैं भी आशा करता ह ँ ू कि भावी विधायक इसे यथा संभव परिपूर्ण बनाने की कोशिश करेंगे। पुडिंग का मजा खाने में है। इसी प्रकार से कोई भी यह नहीं कह सकता है कि इस संविधान की तारीफ की जाए या निंदा की जाए। संविधान का कार्य करना ही दिखा पाएगा कि यह कार्य करने योग्य संविधान है या िQर यह हमारे लोगों या हमारे राष्ट ्र की प्रतिभाओं के समय और जरूरत के अनुसार अनुपयुक्त है, लेकिन यदि हम प्रस्तावना की भावना के अनुरूप कार्य करें, तो हम कह सकते हैं कि हमारे पास एक संविधान है, जिस पर समुचित भावना के साथ कार्य करके उसे एक आदर्श संविधान बनाया जा सकता है-
पूरी विनम्रता के साथ इस संविधान के आधार पर कार्य करने की कोशिश करें, जिसे लोगों ने काफी मेहनत करके तैयार किया है और यदि हम प्रस्तावना की भावना के अनुरूप कार्य करें, अर्थात् सभी के साथ न्याय करने की कोशिश करें, और समानता तथा भाईचारे की भावना केसाथ कार्य करें, तो हम इस नीरस संविधान को भी जन्नत का बाग बना सकते हैं।
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1 श्री एच. जे. खांडेकर (सी.पी. और बरारः जनरल)ः सभापति महोदय मैं अपने मित्र माननीय डा. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के समर्थन में खड़ा हुआ ह ँ ू-
मैं प्रारूप समिति को यह संविधान तैयार करने के लिए बधाई देता ह ँ ू। महोदय, मैं अपने मित्र पंडित एच.वी. कामथ, जी.जी. के भक्त का भी इस संविधान निर्माण के कार्य में गहरी रूचि लेने के लिए धन्यवाद करता ह ँ ू-
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महोदय, आज हम डॉ, अम्बेडकर, का प्रारूप समिति के अधयक्ष की बुद्धिमत्ता में स्वतंत्र भारत का कानून बना रहे हैं। महोदय, यदि मैं ऐसा कर सकता ह ँ ू तो मैं इस संविधान को महार कानून कह ँ ूगा क्योंकि डॉ. अम्बेडकर एक महार हैं और अब जब हम 26 जनवरी 1950 को इसका उद्घाटन करने जा रहे हैं तब हमारा मनु का कानून बदलकर महार का कानून बन जाएगा। और मैं आशा करता ह ँ ू कि मनु के कानून के
11 सी.ए.डी., अधिकारिक प्रतिवेदन खंडसी.ए.डी., अधिकारिक प्रतिवेदन खंड X,X, 21 नवंबर, 1949, पृष्ठ 735-73621 नवंबर, 1949, पृष्ठ 736-737