खंड आठ प्रारुप विधान का तीसरा पठन - Page 187

172 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सही में वर्तमान युग का मनु कहा जा सकता है। ऐसा नहीं है कि कानून बनाने का प्रभार पाने वाले व्यक्ति कोई चीज सृजित करता है। उस अथ में कोई व्यक्ति महार समुदाय का हो या ब्रा ह् मण समुदाय का या फिर किसी अन्य समुदाय का, यदि उसके पास वह अंतर्दृष्टि है, तो वह उन चीजों को परख सकता है और उन्हें सिर्फ अपने समुदाय के लिए नहीं, अपने समुदाय के दृष्टिगत ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता को संहिताबद्धा कर सकता है, तो उसे सच्चे अर्थों में मनु कहा जा सकता है-

1 श्री पी.जे. चाको (ट ्र ावनकोर और कोचीन संयुक्त प्रांत)ः मैं जानता ह ँ ू कि संवैधानिक प्रयोग की सफलता संविधान में अंतर्विष्ट उपबंधों की अपेक्षा लोगों के चरित्र और युग की दशा पर कहीं अधिक निर्भर करती है। इसलिए इन दोषों को स्वीकार करते हुए, मैं समझता ह ँ ू कि यह संविधान सफलतापूर्वक कार्य करे, इसके लिए ईमानदार प्रयास करना हमारा कर्तव्य है। हमें यह विश्वास करना चाहिए कि अंधोरा जल्द छटेगा और सवेरा होगा तथा हम संविधान में संशोधन कर पाए ँ गे और सभी राज्यों के साथ समान व्यवहार होगा तथा इसके अंगीभूत राज्यों को भी कुछ शक्ति प्रदान की जाएगी। इन कमियों को स्वीकार करते हुए हम इसके सQलतापूर्वक उपयोग करने की कोशिश करें।

[2] सरदार हुकुम सिंह (पूर्वी पंजाब)ः सभापति महोदय, मैं अपने मूल्यवान सभापति जिके धौर्य, सहनशीलता और न्याय की भावना ने इन कार्यवाहियों के दौरान हम सबका मार्गदर्शन किया और इन सभी चरणों में सभी कुछ सफलतापूर्वक संपन्न कराने में जिनका काफी योगदान मिला, के प्रति अपनी सच्ची श्रद्धा व्यक्त करने के साथ शुरूआत करना चाह ँ ूगा। मैं प्रारुप समिति और विशेषकर इसके नेता को इस अवधि के दौरान भारी दबावपूर्ण कार्यां को प्रसन्नतापूर्वक संपन्न कराने के लिए बधाई देता ह ँ ू। यह एक बड़ा भारी कार्य था और इसके बाद वे लोग राहत महसूस कर रहे होंगे-

3 श्री एस. नागप्पा (मद्रासः जनरल)ः सभापति महोदय, मेरे से पूर्व बहुत सारे वक्ता बोल चुके हैं और प्रारुप समिति तथा इसके अधयक्ष को बधाई दे चुके हैं। महोदय, मैं उन्हीं के साथ सुर मिलाकर उन सबको बधाई देता ह ँ ू।

अनुसूचित वर्गों का जह ँ ा तक संबंध है, उन लोगों को उसी दिन उपलब्धि

1 सी.ए.डी., अधिकारिक प्रतिवेदन खंड ग, 21 नवंबर, 1949, पृष्ठ 748

2 सी.ए.डी., अधिकारिक प्रतिवेदन खंड ग, 21 नवंबर, 1949, पृष्ठ 749

3 सी.ए.डी., अधिकारिक प्रतिवेदन खंड ग, 21 नवंबर, 1949, पृष्ठ 754