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हासिल हो गई जिस दिन डॉ. अम्बेडकर प्रारुप समिति के अधयक्ष के रूप में निर्वाचित हुए थे। वह अनुसूचित वर्गों के हितों को उजागर करने वाले मसीहा रहे हैं। वह अधयक्ष के तौर पर निर्वाचित हुए उनके निर्वाचित होने के बाद से ही, अनुसूचित वर्गों के अन्य सदस्य सहयोग करने के प्रति बिल्कुल उदासीन से हो गए, इसका कारण यह नहीं था कि वे सहयोग नहीं करना चाहते थे बल्कि इसका कारण यह था कि वे जानते थे कि महोदय, इससे यह सिद्ध हो गया है कि डॉ. अम्बेडकर यद्यपि अनुसूचित वर्ग से आते हैं। अवसर मिलने पर किस ऊँ चाई तक पह ँ ुच सकते हैं। उन्होंने सुयोग्य तरीके से संविधान का प्रारूप तैयार करके और उसे प्रस्तुत करके अपनी कुशलता सिद्ध कर दी है। अब, मैं सोचता ह ँ ू कि इससे अनुसूचित वर्गों के अकुशल होने का दाग धुल जाएगा और अब के बाद यह दाग उन लोगों के दामन पर नहीं लगाया जाएगा। केवल यदि अवसर मिले तो वे लोग किसी से भी स्वयं को बेहतर साबित कर सकते हैं। अनुसूचित वर्गों की ओर से इतनी अच्छी भूमिका निभाने के लिए मैं डॉ. अम्बेडकर को बधाई देता ह ँ ू। अनुसूचित वर्गों की संख्या के कारण वह प्रारुप समिति के अधयक्ष नहीं बनाए गए थे, बल्कि बहुमत वाले दल की उदारता के कारण ऐसा हुआ था और मैं उन दलों का भी इसके लिए बहुत आभारी ह ँ ू।
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अब, मैं इसे आम आदमी के लाभ और बेहतरी करने वाला संविधान मानता ह ँ ू। इसे आम आदमी का संविधान कहा जा सकता है। इसमें जमींदार रईसों या उद्योगपतियों के अधिकारों की तुलना में आम आदमी के अधिकार कहीं अधिक सुरक्षित किए गए हैं। इससे इस देश के आम आदमी का भला होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि यद्यपि डॉ. अम्बेडकर का समाज में ऊँचा दर्जा है, फिर भी वह आम आदमी के बीच से आए हुए हैं। उन्होंने आम आदमी के हितों को भुलाया नहीं है और उनकी बेहतरी के लिए यथासंभव उन्होंने पर्याप्त कार्य किए हैं। अनुच्छेद 14 से 17 के माधयम से अनुसूचित वर्गों की बेहतरी होती रहेगी। अनुच्छेद 14 में विशेषकर प्रत्येक व्यक्ति के लिए समानता करने का आश्वासन दिया गया है। यह एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण-
श्री सभापतिः
[1] श्री जसपत राय कपूर (संयुक्त प्रांतः जनरल)ः डॉ. अम्बेडकर और उनके सहयोगियों की लगभग प्रत्येक वक्ता ने प्रशंसा की है, और वे लोग वास्तव में
1 सी.ए.डी., अधिकारिक प्रतिवेदन खंड ग, 21 नवंबर, 1949, पृष्ठ 758