खंड आठ प्रारुप विधान का तीसरा पठन - Page 189

174 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उसके हकदार भी हैं। मैं शुरूआत में मैं डॉ. अम्बेडकर के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित था क्योंकि कई वर्ष पहले मेरे मन में उनके विरुद्ध) खटास पैदा हो गई थी जब महात्मा गाँधी अनुसूचित जातियों को पृथक निर्वाचन का अधिकार दिए जाने के विरुद्ध अनुष्ठन कर रहे थे और मैंने अखबारों में यह समाचार पढ़ा था कि जब श्री अम्बेडकर को महात्मा गांधी से उस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए आमंत्रित किया गया, तो उन्होंने तत्काल कह दिया कि वह अगले एक या दो दिनों तक कुछ व्यावसायिक व्यस्तताओं के कारण काफी व्यस्त हैं। उस समय मुझे बड़ा दुःख हुआ था। मैं नहीं जानता कि उन बातों में कितने सच्चाई है। लेकिन फिर इन तीन वर्षों के दौरान उन्होंने जो महान कार्य किया है, उसमें उस पाप या दूसरे पाप जो उन्होंने किए होंगे, को धो डाला है। उन्होंने जो अति उपयोगी तथा देशभक्तिपूर्ण कार्य को अंजाम दिया है, उसके लिए मैं उनका प्रशंसक बन गया ह ूँ और मैं उनसे स्नेह भी करने लगा ह ँ ू। इस सभा में इनके पहले भाषण में उनके बारे में मेरी सभी शंकाओं और भय को निर्मल कर दिया था और आज मैं कह सकता ह ँ ू कि मैं उन्हें इस देश के सर्वोत्तम राष्ट ्र भक्तों में से एक मानता ह ँ ू मैंने उन्हें प्रत्येक विषय पर बड़ा ही रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए देखा है। कई अवसरों पर जब गतिरोध पैदा होता दिखा तो उन्होंने आगे आकर सुझाव दिए जिससे उन गतिरोधों का समाधान हो सका। मैंने उन्हें हमेशा ही एक अवसर को छोड़कर वे अवसर से ऊ पर उठते हुए देखा है, दुर्भाग्यवश एक अवसर ऐसा आया था जब उन्होंने अनुसूचित जातियों के लिए सीटें आरक्षण करने के प्रावधान को छोड़ देने पर सहमत नहीं हुए थे। अन्य प्रत्येक अल्पसंख्यक समूह ने सीटों के आरक्षण के अधिकार को छोड़ दिया था लेकिन दुर्भाग्यवश डॉ. अम्बेडकर उस पर सहमत नहीं हुए थे। मेरी इच्छा थी कि वह उस पर सहमति जता देते और फिर मैं आज यह कह पाने की स्थिति में होता कि उन्होंने हमेशा अवसर से ऊ पर उठकर कार्य किया, लेकिन दुर्भाग्यवश मैं आज ऐसा नहीं कह सकता। जैसा भी है, इस बात को छोड़ दें तो उन्होंने जो महान कार्य किया है, उसके प्रति बड़ा आभारी होना चाहिएः-

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1 बेगम ऐजाज रसूल (संयुक्त प्रांतः मुस्लिम)ः सभापति महोदय, यह वास्तव में बड़ा ही भव्य और शुभ अवसर है कि इस संविधान सभा में स्वतंत्र भारत के लिए संविधान प्रारूपित करने का भारी कार्य पूरा कर लिया है - एक ऐसा संविधान जिससे भारतीय लोगों की आशा और आकांक्षाए ँ ब ँ धी हुई हैं। यदि संविधान का मूल्यांकन उसमें

1 सी.ए.डी. अधिकारिक प्रतिवेदन, खंड X 22 नवंबर 1949, पृष्ठ 774