खंड आठ प्रारुप विधान का तीसरा पठन - Page 190

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प्रयुक्त शब्दों या उसमें अंतर्विष्ट उपबंधों के आधार पर किया जाए तो निश्चय ही हमारा संविधान विश्व के संविधानों के बीच बड़ ही ऊँ चा स्थान पाने का हकदार है और मैं समझती ह ँ कि इस पर गर्व करना बिल्कुल सही है। मैं डॉ. अम्बेडकर और पा्ररूप समिति के सदस्यों को उनके आश्चर्यजनक कार्य के लिए बधाई देना चाहती ह ँ ू और सभापति महोदय आपने जिस धौर्य और कुशलता के साथ इस सभा की कार्यवाहियों को संचालित किया, उसके लिए आपका धन्यवाद करती ह ँ ू। संविधान सभा का सचिववालय कर्मचारी भी अपने कठिन कार्य और निरंतर परिश्रम के कारण हमारे धान्यवाद के पात्र हैं।

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महोदय इस संविधान की सबसे उत्कृष्ट विशेषता इस तथ्य में है कि भारत एक विशुद्धा रूप से धर्मनिरपेक्ष राज्य है। संविधान की पवित्रता धर्मनिरपेक्षता के प्रति इसमें दुहराई गई प्रतिबद्धता में है और हमें इस पर गर्व है। मुझे पूरा विश्वास है कि इस धर्मनिरपेक्षता की हमेशा रक्षा की जाएगी और यह कभी कलुष्ति नहीं होगी। क्योंकि इसी पर भारत के लोगों की संपूर्ण एकता निर्भर करती है जिसके बिना प्रगति की सभी आशाए ँ निरर्थक साबित होंगी।

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1 पंडित हृ दयनाथ कुजः महोदय, इस संबंध में हम सभी को पूरी ईमानदारी से प्रारूप समिति के प्रति श्रद्धा व्यक्त करनी चाहिए कि उसमें कुशलता और पूर्णता के साथ इस कार्य को अंजाम दिया है। इसके सदस्यों ने वैयक्तिक तथा सामूहिक दोनों ही रूप से कठिन परिश्रम किया है और किसी के लिए भी यह कहना असंभव है कि उन लोगों द्वारा की गई सभी सिफारिशों का स्वरूप ऐसा है कि सभा के सभी वर्ग उनका अनुमोदन कर देंगे, फिर भी यह स्वीकार करना चाहिए कि उन लोगों न े अपना कर्तव्य पूरा किया और अपनी इच्छाओं को प्रभावी बनाने के लिए लोग स्वतंत्र हैं और उन लोगों ने स्वतंत्रता के क्र म को व्यापक बनाना चाहा था -

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2 श्री श्यामनंदन सहाय (बिहारः जनरल)ः जैसा कि मैं पहले कह चुका ह ँ ू कि वर्तमान में यह अवसर अद्वितीय है और यह कई मामले में अद्वितीय है। यह इतिहास के कालखंड जो भूतकाल का वर्णन करता है, के मामले में अद्वितीय है। यदि

12 सी.ए.डी. अधिकारिक प्रतिवेदन, खंड सी.ए.डी. अधिकारिक प्रतिवेदन, खंड XX 18 नवंबर 1949, पृष्ठ 78218 नवंबर 1949, पृष्ठ 787