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1 श्रीमती हंसा मेहता (बंबईः जनरल)ः किसी संविधान की अच्छाई या बुराई इस बात पर निर्भर करती है कि उसका उपयोग किस प्रकार किया जाता है। यदि यह लोगों के हितों में कार्य करता है, तो यह एक अच्छा संविधान होगाः यदि इसका अन्यथा उपयोग किया जाएगा तो यह एक खराब संविधान होगा। यह तो भावी मतदाताओं पर निर्भर है कि वे सही किस्म के व्यक्तियों को निर्वाचित करके भेजें जो लोगों के हित में संविधान का उपयोग करेंगे। इसलिए जिम्मेदारी लोगों की है। फिर भी मैं एक बात कहना चाह ँ ूगी कि जिन परिस्थितियों में हम लोग थे, हम इससे बेहतर संविधान तैयार नहीं कर सकते थे। सभा के अंदर इतने अलग-अलग विचार व्यक्त किए गए थे, वास्तव में यह एक चमत्कार ही है कि हम इस हद तक किसी बात पर सहमत हो पाए हैं, एक सिरे पर सेठ गोविंद दास थे, जो गायों के रक्षक हैं तो दूसरे सिरे पर प्रो. के. टी., हारे हुए कुलों के रक्षक और बीच में इतने सारे अलग-अलग विचारधारा के लोग अंतिम वक्ता (श्री रोहिणी कुमार चौधरी) एक अच्छा उदाहरण देंगे -
1 श्री लोकनाथ मिश्रः यह मेरा विचार है कि हमारा संविधान आधानिक विश्व के महान सभ्यता के दस्तावेज के रूप में जाना जाएगा। लेकिन मैं किसी किस्म की आत्म-प्रशंसा, प्रारूप समिति या माननीय सदस्यों या हमारे माननीय सभापति या किसी के लिए भी कोई प्रशंसा नहीं करना चाह ँ ूगा। इसका कारण है कि हम सबने केवल अपना कर्तव्य निभाया है जितना हम कर सकते थे और हमारे परिश्रम का मूल्यांकन करना लोगों के हाथो में है -
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2 श्री जदुवंश सहाय (बिहारः जनरल)ः महोदय, इस संविधान के विभिन्न पहलुओं के बारे में बहुत कुछ कहा जा चुका है - तथ्य यही है कि हमारा राष्ट ्र के रूप में जन्म हुआ है और हमें लोकतंत्र की कला सीखनी है। लोकतंत्र का पाठ किसी पुस्तक में नहीं पढ़ाया जाता है, उसका विकार करना पड़ता है। यह सब किसी राष्ट ्र के चरित्र्, निष्ठा ईमानदारी, लोकतांत्रिक सिद्धांतों के प्रति हमारे प्रेम और उनको पूरा करना और उनका पालन करने के हमारे उत्साह पर निर्भर करता है, जो किसी संविधान को बना या बिगाड़ सकता है। किसी देश का संविधान ठंडे अक्षरों पर निर्भर नहीं करता,
1 12 सी.ए.डी., अधिकारिक प्रतिवेदन खंड ग, 21 नवंबर, 1949, पृष्ठ 788 सी.ए.डी., अधिकारिक प्रतिवेदन खंडसी.ए.डी., अधिकारिक प्रतिवेदन खंड XX,, 22 नवंबर, 1949, पृष्ठ 79722 नवंबर, 1949, पृष्ठ 800