खंड आठ प्रारुप विधान का तीसरा पठन - Page 195

180 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

है, से अलग हट जाए तो उसका कोई भविष्य नहीं होता है। लेकिन इस देश ने प्राचीन परंपराओं और आदर्शों का धयान रखते हुए च क्र का सही चुनाव किया है जिसे अशोक का धार्म च क्र कहा जाता है और महात्मा गांधा में इस च क्र को आशीर्वाद दिया है इस राष्ट्र के ऊ पर चक्कर काटती उनकी आत्मा और हमारे धवज के इस प्रतीक चि ह् न के कारण इस सभा और भावी नेताओं का यह कर्तव्य बनता है कि वे कांग्रेस की नीतियों को बनाए रखें तथा इस राष्ट ्र की नियति को पूरा करें।

2 श्री अरि बहादुर गुरूंग (पश्चिमी बंगालः जनरल)ः सभापति महोदय, मैं प्रारूप समिति के अधयक्ष को बधाई देने में अपने सहयोगियों के साथ सहबद्ध करता ह ँ ू -

3 ज्ञानी गुरूमुख सिंह मुसाफिर (पूर्वी पंजाबः सिक्ख)ः एक और शब्द कहकर मैं अपनी बात समाप्त करू ँ गा। प्रारुप तैयार करने में डॉ. अम्बेडकर और प्रारुप समितियों के सदस्यों ने काफी मेहनत की है। वे लोग इतने कम समय में और इतनी प्रतिकूल परिस्थितियों के अंदर इस प्रारूप को तैयार करने के लिए हमारे बधाई के पात्र हैं -

1 श्री आर.वी. धुलेकर (संयुक्त प्रांतः जनरल)ः सभापति महोदय, मैं डॉ. अम्बेडकर द्वारा इस सभा के समक्ष रखे गए संकल्प के समर्थन में खड़ा हुआ ह ँ ू। इन तीन वर्षों में संविधान पर विस्तार से चर्चा की गई है और इसलिए संविधान में मौजूद सभी दोषों और अच्छाइयों के बारे में चर्चा करने का समय नहीं रहा। मुझे संतोष है कि कुल मिलाकर यह एक अच्छा संविधान है। हर कोई जानता है कि दूधा में 75 प्रतिशत से अधिक पानी होता है और यदि संतुलन अच्छा है, तो यह हमारे श्रीर का रख-रखाव करता है और इसे शक्ति प्रदान करता है। यह लंबा जीवन देता है ...

अंत में, सभापति महोदय मैं आपके और डा. अम्बेडकर के लिए हृ दय से धान्यवाद करता ह ँ ू। हमारे सामने एक बड़ा कार्य था। डॉ. अम्बेडकर ने बहुत बड़ा कार्य किया है। मैं इसे हरकुलियन का कार्य नहीं कह ँ ूगा क्योंकि वह शब्द भी इस बड़े कार्य के लिए छोटा पड़ जाता है। उन्होंने महान पांडव भीम के समान और अपने नाम भीमराव अम्बेडकर के अनुरूप महान कार्य किया है - उन्होंने निश्चय ही अपने नाम भीमराव

23 वही, पृष्ठ 821 वही, पृष्ठ 825

1 सी.ए.डी. अधिकारिक प्रतिवेदन, खंड X 18 नवंबर 1949, पृष्ठ 826