खंड आठ प्रारुप विधान का तीसरा पठन - Page 198

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और अधिक त्याग करने की जरूरत है। किसी वस्तु का निर्माण करने की अपेक्षा उसे नष्ट करना कहीं आसान होता है। देश में गुलामी का भार समाप्त होने के साथ ही हमारे समक्ष रचनात्मक कार्यों के लिए पूरा अवसर मौजूद है फिर हमें अपने भारत का निर्माण करने में जुट जाना चाहिए जिससे इसका प्राचीन मूल्य लौ आए तथा भविष्य गौरवपूर्ण हो सके -

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1 श्री बी.एम. गुप्तेः आखिरकार, किसी संविधान का मूल्यांकन महज उसके प्रयुक्त शब्दों या कागज के आधार पर नहीं हो सकता। अतः न तो संविधान और न ही उसे बनाने वाले का महत्व होता है, बल्कि जिन लोगों के लिए संविधान बनाया गया है और तथा जिस भावना के साथ उसका उपयोग किया जाता है, उसका महत्व होता है। कोई भी संविधान कागज पर अच्छा हो सकता है, लेकिन इसकी सफलता इस पर निर्भर करती है कि लागू किस प्रकार से किया जाता है....

प्रारम्भिक कठिनाइयों और यदा-कदा हुई त्रुटियों के बावजूद, मैं आमतौर पर यह आशा करता ह ूँ कि अंततः आम आदमी की सामान्य सोच की ही जीत होगी। हमारा कार्य केवल साधान तैयार करना था। इसका उपयोग करना दूसरों की जिम्मेदारी है। जहाँ तक मैं देख सकता ह ँ ू कि हम निश्चय ही दावा कर सकते हैं कि हमने अपनी सर्वोत्तम योग्यता के साथ और अपनी सर्वोत्तम दृष्टि से इसे तैयार किया है। यह एक साधन है जिसका समुचित उपयोग हो सकता है। और इसे समुचित रूप से लचीला बनाया जा सकता है। यह सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करता है। यदि हम इस संविधान के उपबंधों का अध्ययन करें, तो हम पाए ँ गे कि प्रारूप समिति की एक प्रमुख चिंता नए देश की सुरक्षा को लेकर भी है। इसलिए, इस संविधान में प्रगति को बाधित किए बिना सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित की गई है। यह व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास के बिना हस्तक्षेप किए हुए सामुहिक हित को बढ़ावा देता है। लेकिन, मेरी राय में, संविधान की वास्तविक जा ँ च इस बात से हो सकेगी कि क्या विगत में पीढ़ी दर पीढ़ी पीडि़त होते रहे आम आदमी की दुर्दशा में तेजी से सुधार लाने में सक्षम है। यदि यह संविधान आम आदमी के लिए कुछ भी सांत्वना लाता है, तो निश्चय ही इसे तैयार करने में जो मैंने सहयोग दिया है, उस पर गौरवान्वित महसूस करू ँ गा।

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1 सी.ए.डी. अधिकारिक प्रतिवेदन, खंड X 1 23 नवंबर 1949, पृष्ठ 445