184 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
1 श्री बलवंत सिन्हा मेहताः तथ्य तो यह है कि हमारे द्वारा तैयार किया गया संविधान न सिर्फ विस्तृत है बल्कि बहुत अच्छा भी है। मुझे पूरा विश्वास है कि विदेशों के लोग जब देखेंगे कि हमने स्वयं के लिए कितना अच्छा संविधान तैयार किया है, तो वे आश्चर्य करेंगे। इस महती सभा के सभी सदस्यों और प्रारुप समिति के सदस्यों विशेषकर डॉ. अम्बेडकर, टी.टी. कृष्णमाचारी, श्री आलादी कृष्णा स्वामी और अन्य ने संविधान को समुचित रूप देने के लिए काफी परिश्रम किया है। मेरा मानना है कि ये सभी सज्जन हमारी प्रशंसा के पात्र हैं, हमें उनकी प्रशंसा करनी चाहिए। हम पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और अन्य कांगे्रस नेताओं तथा शहीदों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
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2 सरदार सुचेत सिंहः हमारे संविधान में सभापति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की उच्च कोटि की भलमनसाहत, पंडित जवाहर लाल नेहरू की सार्वभौमिक अंतर्दृष्टि, सरदार बल्लभभाई पटेल की कभी न धोखा खाने वाली विवेकसम्मत दृष्टि और शक्ति, डॉ. पट्टाभि सीता रमैया की प्रखर और तीक्ष्ण बौद्धिकता, डॉ. अम्बेडकर का पांडित्य और परिश्रम और सबसे अधिक, राष्ट्रपति हमारे पूज्यनीय महात्मा गांधा का पितातुल्य आशीर्वाद और दैवी प्रेरणा झलकती है। मैं आशा तथा प्रार्थना करता ह ँ ू कि हमारे लाखा ें देशवासियों का यह अति महत्वपूर्ण स्वतंत्रता का चार्टर न सिर्फ इस देश के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए शांति समृद्धि और खुशी लाने में विफल नहीं रहेगा। (सदस्यों ने खुशी प्रकट की)
1 श्री टी.जे. एम. विल्सन (मद्रासः जनरल)ः सभापति महोदय, मैं भी आपको राष्ट ्र पति जी और इस संविधान की प्रारुप समिति के अध्यक्ष और सदस्यों का धन्यवाद करता ह ँ ू....
‘‘ मैं संविधान की इस आलोचना पर आता ह ँ ू कि इसमें आम आदमी के लिए कुछ भी उपबंध नहीं किया गया है, इसमें सामाजिक और आर्थिक न्याय का उपबंध नहीं किया गया है। महोदय, मेरा यह कहना है कि यह एक गलत आलोचना है क्योंकि यह संविधान के दायरे की गलत अवधारणा पर आधारित है। संविधान एक सीमित दायरा होता है इसका मुख्य कार्य सरकार को मशीनरी प्रदान करना है, चाहे उसका स्वरूप कुछ
121 सी.ए.डी. अधिकारिक प्रतिवेदन, खंड वही, पृष्ठ 855-856 सी.ए.डी. अधिकारिक प्रतिवेदन, खंड XX 11 23 नवंबर 1949, पृष्ठ 46123 नवंबर 1949, पृष्ठ 856