खंड आठ प्रारुप विधान का तीसरा पठन - Page 201

186 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

ही तर्कहीन है जितनी कि यह शिकायत बेकार कि इसमें अधिनायकवाद पनपने का खुला विकल्प है। लोकतंत्र की सही जाँच लोगों को यह निर्णय करने का अधिकार देने में है कि वे सरकार को कौन सा स्वरूप पसंद करेंगे। अधिनायकवाद या सर्वहारा साम्यवाद का प्रश्न पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि लोग किस तरह से संविधान का उपयोग करते हैं। संविधान लोगों की इच्छा के अनुरूप निरंतर संशोधनों के विषयाधीन रहेगा। संविधान में ऐसे उपबंध पहले ही किए जा चुके हैं। महोदय, वैयक्ति तौर पर मेरा मानना है कि संविधान का चरित्र पवित्र होता है जिससे भावी पीढि़यों को प्रेरणा मिलती है। इसमें जीवंत विश्वास और दर्शन का समावेश है। इसलिए हमें इस ब्रह्मवाक्य को नहीं भूलना चाहिए ....

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2 श्री मणिक्य लाल वर्मा (राजस्थान का संयुक्त प्रांत)ः सभापति महोदय, सबसे पहले, मैं इस अवसर पर माननीय डॉ. अम्बेडकर और इस सभा के सदस्यों का धन्यवाद करता हूँ ....

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1 श्रीमती पूर्णिमा बनर्जी (संयुक्त प्रांतः जनरल)ः महोदय, एक ही बात की थोड़ी सी पुनरावृत्ति करते हुए, सबसे पहले मैं प्रारुप समिति के सदस्यों आपको और उन सभी लोगों जिन्होंने इस संविधान को तैयार करने के विभिन्न चरणों में इतनी महत्वपूर्ण और अनिवार्य भूमिका निभाई है, का धन्यवाद करने हेतु अपने सहयोगियों के साथ स्वयं को सहबद्ध करती हूँ। किसी के प्रति बिना कोई पक्षपातपूर्ण वैमनस्यता रखे हुए, मैं इस सभा में पीछे बैठने वाले लोगों की ओर से आपका विशेष तौर पर धन्यवाद करती हूँ क्योंकि संविधान पारित होने के विभिन्न चरणों में जब कभी हमने संविधान के कतिपय खंडों के संबंध सही या गलत शंकाएँ व्यक्त की, आपने हमारी ओर से अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए प्रारुप समिति से इन शंकाओं का निवारण कराया। ने कैसी संस्था स्थापित की है, लोग किस प्रकार से रहना चाहते हैं, वहाँ किस प्रकार की राजनैतिक व्यवस्थाएँ हैं जिसके अधीन वे अपने निर्णय का प्रयोग करते हैं और भविष्य के लिए लोगों की क्या आशाएँ और आकांक्षाएँ हैं।

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1 2 वही, पृष्ठ 607-608सी.ए.डी. अधिकारिक प्रतिवेदन, खंड X 1 23 नवंबर 1949, पृष्ठ 868