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2 श्री के.एम. जेधे (बंबईः जनरल)ः सभापति महोदय, मैं यहाँ डॉ. अम्बेडकर और उनके सहयोगियों को भारत के लिए संविधान का निर्माण करने में जो कठिन परिश्रम किए हैं, उसके लिए बधाई देने हेतु खड़ा हूँ। हमने इस महान कार्य को पूरा करने में लगभग तीन वर्ष लगाए हैं।
कुछ सदस्यों ने डॉ. अम्बेडकर को बधाई देते हुए उन्हें वर्तमान मनु की संज्ञा दी है। मुझे पूरा विश्वास है कि वह इस विशेषण को पसंद नहीं करेंगे। मैं जानता हूँ कि वह मनु से घृणा करते हैं, जिसने चार वर्णों का निर्माण किया है, सबसे निचले वर्ण में अछूत वर्ग के लोग आते हैं। मुझे याद है कि उन्होंने 1929 में महार में अछूतों की एक विशाल सभा में सार्वजनिक तौर पर मनुस्मृति को जलाया था। वह हरिजनों के महान नेता हैं। और उन्हें उनका मसीहा कहा जाता है और उन्हें एक भगवान की तरह पूजा जाता है। उन लोगों को उन पर बड़ा ही गर्व है वे लोग उन्होंने भीम स्मृति तैयार की है। मैं भी इसे भी स्मृति कहता हूँ। यद्यपि मैं स्पर्श्य वर्ग से आता हूँ। डॉ. अम्बेडकर एक महान वकील हैं और काफी सुयोग्य और बुद्धिमान व्यक्ति हैं। किसी को भी इसमें संशय नहीं है। कानून के द्वारा छुआछूत को समाप्त कर दिया गया है और संविधान का निर्माण करते समय डॉ. अम्बेडकर ने हरिजनों के हितों की रक्षा करने में काफी रुचि ली। साथ ही, हमें अपने राष्ट्रपिता, महात्मा गाँधी जिन्होंने हमें आजादी दिलाई के प्रति भी आभारी होना चाहिए। उनकी बड़ी इच्छा थी कि हरिजनों को स्पृश्य के स्तर तक ले आया जाए। अपनी इस बड़ी इच्छा को पूरा होते देखने और हमें आशीर्वाद देने हेतु वह आज हमारे बीच नहीं हैं क्योंकि वह एक क्रूर और दुष्टों के षड़यंत्र के शिकार हो गए....
1 श्री जयपाल सिंह (बिहारः जनरल)ः सभापति महोदय, मैं डॉ. अम्बेडकर और उनकी कड़ी परिश्रमी टीम ने नए संविधान बनाने का जो दुष्कर कार्य किया है, उसके लिए एक ही बात न दुहराने की आपकी सलाह की उपेक्षा करते हुए मैं उन लोगों के प्रति अपनी बिना शर्त श्रद्धा व्यक्त करता हूँ। महोदय, मैं विनम्रता पूर्वक यह भी कहूँगा कि आपने हमारे विचार विमर्श की प्रक्रिया का मार्गदर्शन करने में जिस असीम धैर्य का परिचय दिया है।
2 श्री धानु पिल्लैः ... अंत में महोदय, मैंने जो कुछ इस सभा की प्रक्रिया देखी है, मैं आपको बताना चाहता हूँ कि आपने जो धैर्य दर्शाया है, उसे देखकर मैं चकित हूँ। यदि चंद्रमा के साथ हमारे वार्तालाप करने का भी प्रश्न होता, और यदि नियम इसकी अनुमति देता तो आप उस पर मतदान कराने के लिए तैयार हो जाते। 122 सी.ए.डी. अधिकारिक प्रतिवेदन, खंड वही, पृष्ठ 890वही, पृष्ठ 898 X 1 21 नवंबर 1949, पृष्ठ 818