खंड आठ प्रारुप विधान का तीसरा पठन - Page 203

188 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(2) हमने आप में इस हद तक धैर्य देखा है। मुझे उन सभी संबंधित लोगों डॉ. अम्बेडकर और श्री आलादी कृष्णा स्वामी अय्यर की योग्यता के लिए संविधान के निर्माण में श्री एम.टी. कृष्णमाचारी और श्री संथानम तथा दूसरों के द्वारा दर्शाई गई गहरी रुचि के लिए धन्यवाद के एक शब्द कहने की अनुमति दी जाए - जब मैंने इन कुछेक नामों का उल्लेख किया है, तो उसका यह अर्थ कदापि नहीं है कि अन्य नाम हैं ही नहीं जिनका उल्लेख किया जाए। प्रत्येक संबंधित व्यक्ति ने बहुत अच्छा कार्य किया है....

3 श्री ओ.वी. अलागेसन (मद्रासः जनरल)ः सभापति महोदय, प्रारुप समिति और इससे जुड़े सभी लोगों को उनकी मेहनत के लिए बधाई दी गई है और हम लोग निश्चय ही संविधान के उपबंधों के बारे में बिल्कुल स्पष्ट तरीके से स्पष्टीकरण देने वाले डॉ. अम्बेडकर की बुलंद आवाज तथा अपने मित्र श्री टी.टी. कृष्णमाचारी जिनके संविधान बनाने में दिए गए योगदान को सभी स्वीकार करते हैं, की भी तेज आवाज सुनने से वंचित हो जाएँगे....

.....महोदय, दूसरा आरोप यह है कि यह संविधान नियंत्रणों और रक्षाउपायों से भरा पड़ा है और यह व्यक्ति की आजादी तथा राज्य की स्वायत्ता को प्रतिबंधित करता है। मै। इसे इतने हल्के में नहीं लेता। ये रक्षा उपाय केवल बाड़ के रूप में लगाए गए हैं जिसका आशय नवजात आजादी और लोकतंत्र को आवारा पशुओं से बचाया जाए। उदाहरण के लिए एक बात यह नहीं कह सकता कि उन भेड़ों को मारकर ले जाने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। यह मेरा उत्तर है जब यह कहा जाता है कि नागरिक स्वतंत्रता

खतरे में है और ये सभी उपबंध उठाए जाने लगते हैं।

महोदय, इस संविधान के अधीन एक पंथनिरपेक्ष लोकतंत्र की मजबूत और सच्ची नींव रखी गई है और यदि हम स्वयं के प्रति, अपनी परम्पराओं के प्रति और अपने नेता महात्मा गांधी के प्रति सच्चे हैं, जो हम सुरक्षित रूप से आशा कर सकते हैं कि हम प्रगति की राह पर चलते जाएँगे और इस प्राचीन भूमि के लिए इस संविधान को वरदान बना देंगे।

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1 श्री एल. कृष्णस्वामी भारतीः महोदय, भारत के इतिहास के किसी भी काल में इतनी सारी यादगार घटनाएँ नहीं हुई हैं जितनी विगत के तीन वर्षों के काल में

1 1 सी.ए.डी. अधिकारिक प्रतिवेदन, खंड वही, पृष्ठ 901 X 1 23 नवंबर 1949, पृष्ठ 894