खंड आठ प्रारुप विधान का तीसरा पठन - Page 204

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हुई हैं। विगत के तीन वर्षों पर गौर करें जबसे हमने इस संविधान का निर्माण करने का विलक्षण कार्य शुरु किया तो हमारे देश के इतिहास में जो दूरगामी परिवर्तन हुए हैं, उसे देखकर कोई भी चकित हो सकता है।

घटना से भरे इस काल के दौरान पाँच यादगार घटनाएँ हुई हैं जो काफी महत्वपूर्ण और बड़ी घटनाएँ हैं। क्रमवार वे घटनाएँ इस प्रकार हैं। हमारे 1. देश का विभाजन 2. आजादी की प्राप्ति 3. राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का निधन 4. भारतीय रियासतों का एकीकरण और अंत में जो कि कम महत्वपूर्ण नहीं है, स्वतंत्र भारत के संविधान का निर्माण....

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2 श्री सारंगधर दासः मैं अपने अधिकतर मित्रों विशेषकर हिंदू मित्रों जो सरकार की गणतांत्रिक प्रणाली अर्थात् हमारे प्राचीन हिंदू राज्य में मौजूद गणतंत्रों में विचरण करते रहते हैं, के अस्तित्व के मामले में असहमति व्यक्त करता हूँ। हमारा कहना यह है कि हमारे निचले वर्गों हमारे समाज की निचली जातियों, जिन्हें हम हरिजन कहकर पुकारते हैं, जिन्हें हमेशा ही दबाकर रखा गया है। परिणामतः उस समय लोकतंत्र नहीं था। यदि लोकतंत्र था भी, गणतंत्र था भी, तो वह केवल उच्च वर्गों जिन्हें हम उचच जाति कहते हैं, के बीच में ही व्याप्त था। यदि आप संविधान को इस दृष्टि से देखें तो, मेरे विचार से छुआछूत समाप्त करना तथा व्यस्क मताधिकार लागू करना दो अति सुंदर तत्व हैं जिन्हें इस संविधान में शामिल किया गया है। महोदय, मैं आपको स्मरण कराना चाहता हूँ कि अमेरिकी संविधान में मताधिकार केवल स्वतंत्र श्वेत नागरिकों को ही दिया गया था क्योंकि उन दिनों श्वेत लोग भी गुलाम थे, जो वेस्टइंडीज और कैरिबयाई द्वीप समूह गुलामों की तरह कार्यरत थे। उन लोगों को मताधिकार से वंचित किया गया है। काले, बशी लोग तो किसी गिनती में ही नहीं थे। उन लोगों को मताधिकार का अधिकार अब्राहम लिंकन के काल में दिया गया था। अतः मैं यह कहना चाहता हूँ कि हमारे संविधान में व्यस्क मताधिकार, महिलाओं का समानता और छुआछूत की समाप्ति को स्वीकार किया गया है, संविधान में ये तीन अति सुंदर चीजें हैं।

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1 श्रीमती अम्मु स्वामीनाथनः हम डॉ. अम्बेडकर और प्रारूप समिति के सदस्यों और संविधान सभा के सचिवालय को इतने सारे सप्ताहों और महीनों तक

12 सी.ए.डी. अधिकारिक प्रतिवेदन, खंड वही, पृष्ठ 913 X 1 23 नवंबर 1949, पृष्ठ 901