194 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्री सभापतिः प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ।
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।
* * * * *
$माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः महोदय, मुझे लगता है कि मेरे मित्र श्री नजरूद्दीन अहमद के मन में कुछ गलतQहमी है, क्योंकि मैं संविधान सभा द्वारा किए गए विभिन्न अधिनियमों के संदर्भ में यह पाता हूँ कि विधेयक में एक प्रस्ताव है कि इसे चौथा संशोधन अधिनियम कहा जाए, यही समुचित शब्द है। संविधान सभा द्वारा पारित पहले अधिनियम को भारत सरकार (संशोधन), अधिनियम 1949 कहा जाता है। दूसरे को भारत सरकार (दूसरा संशोधन) अधिनियम 1949 कहा जाता है, जो एक इकाई से दूसरी इकाई में कैदियों को हटाने से संबंधित है। तीसरा संशोधन अधिनियम 1949 जो संपत्ति को जब्त करने तथा बंगाल चुनाव से संबंधित है।
श्री नजरुद्दीन अहमदः इसे संशोधन अधिनियम बिल्कुल नहीं कहा जाता है। इसका अलग नाम है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यदि खंड को देखें तो आप वहाँ पाएँगे,
‘‘इस अधिनियम को भारत सरकार (दूसरा संशोधन) अधिनियम 1949 कहा जाए।’’
अगले अधिनियम को तीसरा अधिनियम, 1949 कहा जाता है जो जब्त संपत्ति की अभिरक्षा, प्रबंधन और निस्तारण तथा पश्चिमी बंगाल में चुनाव से संबंधित है।
मेरे विचार से गलतफहमी इस तथ्य के कारण पैदा हुई है कि हमने संविधान सभा में दो अन्य अधिनियम पारित किए हैं, एक तो प्रिवी कौंसिल की अधिकारिता की समाप्ति से संबंधित है, तथा दूसरा केंद्रीय सरकार अधिनियम 1946 का संशोधन करने वाला अधिनियम है। वे अधिनियम भारत सरकार के संशोधन अधिनियम बिल्कुल नहीं है। यद्यपि अधिनियमों का भारत सरकार अधिनियम पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन वे संशोधन भारत सरका अधिनियम से संबंधित नहीं है। हम लोग इसलिए इसे चौथे अधिनियम के रूप में वर्गीकृत करने के हकदार हैं क्योंकि जहाँ तक भारत सरकार अधिनियम, 1935 के प्रत्यक्ष संशोधन का संबंध है इस सभा ने केवल तीन अधिनियम
* सी.ए.डी. आधिकारिक प्रतिवेदन, खंड X 25 नवंबर 1949, पृष्ठ 919-220
$वही, 25 नंवबर, 1949, पृष्ठ 923